हिंदी गौरव सम्मान-2026: खंडवा के 68 साहित्यकारों का सम्मान, हिंदी की समृद्ध परंपरा को मिला सम्मान | नगर निगम ने साहित्यकारों के योगदान को सराहा, महापौर बोलीं—हिंदी हमारी पहचान, संस्कार और सांस्कृतिक विरासत की भाषा

खंडवा- हिंदी दिवस के अवसर पर नगर पालिक निगम खंडवा द्वारा रविवार को नगर निगम सभागृह, टाउनहॉल में ‘हिंदी गौरव सम्मान-2026’ समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। समारोह में खंडवा की साहित्यिक परंपरा और हिंदी भाषा के संरक्षण-संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले 68 लेखक, कवि एवं साहित्यकारों को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस पहल के माध्यम से नगर निगम ने साहित्यकारों के रचनात्मक योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम में हिंदी साहित्य से जुड़े रचनाकारों के साथ जनप्रतिनिधि, पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। समारोह का वातावरण साहित्य, भाषा और रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति सम्मान से ओतप्रोत रहा।

साहित्यकार समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं : महापौर

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार, संवेदना और सामाजिक चेतना की भाषा है। खंडवा की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महत्वपूर्ण साहित्यकार और रचनाकार दिए हैं। साहित्यकार अपने लेखन के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं और उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए विचार एवं संस्कार की विरासत बनती हैं।

महापौर ने कहा कि हिंदी दिवस केवल एक दिन हिंदी के प्रति सम्मान व्यक्त करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह अवसर हमें अपने दैनिक जीवन, कार्यालयीन कार्यों और सामाजिक व्यवहार में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। नगर निगम द्वारा हिंदी साधकों का सम्मान इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

साहित्य समाज का दर्पण भी और परिवर्तन का माध्यम भी

समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार आलोक सेठी ने हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और वर्तमान समय में साहित्यकारों की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसमें सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम भी है। हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने और समाज की संवेदनाओं को शब्द देने में साहित्यकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

साहित्यकार रुचि शर्मा ने हिंदी की सहजता, संवेदनशीलता और जनसरोकारों को उसकी वास्तविक शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की भावनाओं, संघर्षों और अनुभवों को अभिव्यक्ति देता है। नई पीढ़ी में हिंदी और साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने तथा युवाओं को साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता है।

वहीं कैलाश मंडलेकर ने साहित्य और समाज के बीच के गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रचनाकार अपने समय और समाज को शब्दों में दर्ज करता है। उन्होंने कविता, व्यंग्य और लेखन सहित विभिन्न साहित्यिक विधाओं को समृद्ध करने तथा सामाजिक विसंगतियों को रचनात्मक तरीके से सामने लाने की आवश्यकता बताई।

तीनों साहित्यकारों ने हिंदी दिवस के अवसर पर नगर निगम द्वारा साहित्यकारों को सम्मानित किए जाने की पहल की सराहना की।

68 लेखक, कवि एवं साहित्यकार सम्मानित

‘हिंदी गौरव सम्मान-2026’ के अंतर्गत अरुण सातले, रघुवीर शर्मा, दर्शना जैन, शैलेन्द्र शरण, हेमंत उपाध्याय, सुनील उपमन्यु, जगदीशचंद्र चौरे, मंगला चौरे, देवेंद्र जैन, रुचि शर्मा, आनंद पेंडसे, डॉ. मुनीष मिश्रा, श्रीकांत साकले, श्वेता शर्मा, दिनेश शुक्ल, दीपक चाकरे, डॉ. अशोक कुमार नेगी, कल्पना दुबे, वैभव कोठारी, हेमलता उपाध्याय, शरद जैन, गोविंद शर्मा, डॉ. श्याम सुंदर तिवारी, राजश्री शर्मा, नासिर हुसैन, वीणा शरद जैन, आनंद जैन, सुनीता त्रिपाठी, नूतन उमरीकर, डॉ. रश्मि दीक्षित, हृदयेश भारद्वाज, शांता अशोक गीते, आलोक सेठी, सीमा मंडलोई, तरुण डांगोर, प्रतिभा आनंद तिवारी, कैलाश मंडलेकर, गोविंद गुंजन, डॉ. कुलदीप फरे, गोविंद गीते, संतोष तिवारी, डॉ. आशुतोष तिवारी, प्रीति संतोष तिवारी, संतोष चौर, अमित मिश्रा, अशोक तारे, अशोक गीते, विदुषी मालपानी, माधुरी मालपानी, डॉ. मोक्षांत जोहरी, गजानंद वास्कले, अर्चना मिश्रा, मीना राठौर, प्रतिभा अरोरा, डॉ. श्रीराम परिहार, डॉ. शहजाद कुरैशी, सुधीर देशपांडे, डॉ. भारती पाराशर, तारकेश्वर चौर, विवेक शर्मा, डॉ. गोपाल नायक, प्रभाकर साले, अर्चना शुक्ला, राजमाला आर्य, विश्वास सोनी, काशीनाथ सोनी, जयश्री तिवारी एवं प्रताप राव कदम को सम्मानित किया गया।

कुछ साहित्यकार अपरिहार्य कारणों से समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। उन्हें बाद में सम्मानित किया जाएगा।

साहित्य और पत्रकारिता दोनों समाज की चेतना के स्वर

कार्यक्रम में हिंदी साहित्य के साथ पत्रकारिता एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के योगदान को भी रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य और मीडिया दोनों समाज की चेतना को स्वर देने का कार्य करते हैं। साहित्य जहां विचार, संवेदना और अनुभवों को शब्द देता है, वहीं पत्रकारिता जनहित से जुड़े मुद्दों को समाज के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।

ऐसे आयोजनों के माध्यम से रचनाकारों को प्रोत्साहन मिलने के साथ नई पीढ़ी को भी भाषा और साहित्य से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी

समारोह में एमआईसी सदस्य अनिल वर्मा, राजेश यादव, सोम नाथ काले, विक्की भावरे, पार्षद पवन गोस्वामी, संतोष सारवान, धर्मेंद्र पालीवाल, रोशनी गोलकर, स्नेहा पाराशर, वेदप्रकाश मालाकार, वरिष्ठ प्रवक्ता सुनील जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, पत्रकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन संदीप जोशी ने किया। अंत में उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

सम्मान से बढ़ेगा साहित्यिक गतिविधियों का उत्साह

‘हिंदी गौरव सम्मान-2026’ केवल सम्मान समारोह नहीं रहा, बल्कि इसने खंडवा की साहित्यिक चेतना और हिंदी भाषा के प्रति सम्मान को भी अभिव्यक्ति दी। 68 साहित्यकारों का सम्मान इस बात का संकेत है कि शहर में हिंदी लेखन, कविता और साहित्य की विविध विधाओं से जुड़े रचनाकार निरंतर सक्रिय हैं।

नगर निगम की यह पहल साहित्यकारों के योगदान को सार्वजनिक पहचान देने के साथ-साथ हिंदी के प्रति नई पीढ़ी में रुचि और सम्मान बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा सकती है।

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