वैश्विक मंच पर छाई मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट कला, ज़हरा पेज़ेशकियान ने प्राकृतिक रंगों की बारीकियां जानीं | भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ‘ब्रिक्स बाज़ार’ में धार की पारंपरिक कला का आकर्षण, ईरान के राष्ट्रपति की सुपुत्री ने स्वयं की ठप्पा छपाई

नई दिल्ली- मध्यप्रदेश की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान मिली है। नई दिल्ली के भव्य भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अंतर्गत ‘ब्रिक्स बाज़ार’ में धार जिले की प्रसिद्ध बाग प्रिंट कला देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों और अतिथियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्राकृतिक रंगों, पारंपरिक तकनीक और बारीक नक्काशीदार लकड़ी के ठप्पों से तैयार होने वाली इस अनूठी कला ने विदेशी मेहमानों को खासा प्रभावित किया।

इसी क्रम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान की सुपुत्री ज़हरा पेज़ेशकियान ने बाग प्रिंट के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री एवं राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेता उनके भाई मोहम्मद काज़िम खत्री के स्टॉल का विशेष अवलोकन किया। उन्होंने बाग प्रिंट की निर्माण प्रक्रिया को न केवल करीब से देखा, बल्कि प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक छपाई तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी भी ली।

प्राकृतिक रंगों की प्रक्रिया को समझने में दिखाई गहरी रुचि

स्टॉल के अवलोकन के दौरान ज़हरा पेज़ेशकियान ने बाग प्रिंट से तैयार विभिन्न हस्तनिर्मित वस्त्रों को बेहद बारीकी से देखा। उन्होंने खास तौर पर यह जानने में रुचि दिखाई कि बाग प्रिंट में इस्तेमाल होने वाला काला रंग किस प्रकार तैयार किया जाता है। शिल्पकारों ने उन्हें प्राकृतिक सामग्रियों से रंग तैयार करने और कपड़े पर उन्हें स्थायी रूप से उकेरने की पारंपरिक प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।

बाग प्रिंट की विशेषता उसके प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तकनीक में निहित है। रंगों की तैयारी से लेकर लकड़ी के ब्लॉक्स की डिजाइनिंग और कपड़े पर उनकी सटीक छपाई तक प्रत्येक चरण में शिल्पकार की मेहनत, अनुभव और कलात्मक कौशल दिखाई देता है। यही बारीकियां इस कला को सामान्य प्रिंटिंग से अलग पहचान देती हैं।

ज़हरा ने स्वयं लगाया पारंपरिक ठप्पा

बाग प्रिंट की कला को करीब से समझने के बाद ज़हरा पेज़ेशकियान ने स्वयं भी इस पारंपरिक कला-प्रक्रिया का अनुभव लिया। उन्होंने लकड़ी के पारंपरिक ठप्पे को रंग में डुबोकर कपड़े पर छपाई की। अपने हाथों से ठप्पा लगाकर बाग प्रिंट तैयार करने का यह अनुभव उनके लिए खासा आकर्षण का केंद्र रहा।

प्राकृतिक रंगों की मौलिकता, हाथ से तैयार लकड़ी के ब्लॉक्स और कपड़े पर उभरती पारंपरिक आकृतियों ने उन्हें प्रभावित किया। उनके इस कला-प्रेमी और आत्मीय रवैये से स्टॉल पर मौजूद शिल्पकार भी उत्साहित नजर आए।

खत्री बंधुओं ने किया विशेष नागरिक अभिनंदन

ज़हरा पेज़ेशकियान की बाग प्रिंट कला में गहरी रुचि से प्रभावित होकर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री ने उनका विशेष नागरिक अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्हें पारंपरिक बाग प्रिंट से तैयार भव्य अंगवस्त्रम भेंट किया गया।

भारतीय हस्तशिल्प, संस्कृति और परंपरा से जुड़े इस आत्मीय सम्मान को पाकर ज़हरा पेज़ेशकियान बेहद प्रसन्न दिखाई दीं। यह अवसर भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक संबंधों और कला के माध्यम से आपसी जुड़ाव की एक खूबसूरत झलक भी प्रस्तुत करता नजर आया।

ब्रिक्स बाज़ार में लाइव डेमोंस्ट्रेशन से लोगों को आकर्षित कर रहा बाग प्रिंट

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ‘ब्रिक्स बाज़ार’ में धार की बाग प्रिंट कला को केवल तैयार उत्पादों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसकी जीवंत निर्माण प्रक्रिया यानी लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से भी प्रस्तुत किया जा रहा है।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मोहम्मद बिलाल खत्री और राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेता मोहम्मद काज़िम खत्री अपने स्टॉल पर बाग प्रिंट की पारंपरिक तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे विदेशी प्रतिनिधियों और अन्य अतिथियों को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के ब्लॉक्स की मदद से किस प्रकार कपड़े पर आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाते हैं।

‘BRICS’ लोगो वाले ब्लॉक्स से प्रतिनिधियों ने लिया यादगार अनुभव

बाग प्रिंट स्टॉल की एक खास विशेषता ‘BRICS’ लोगो वाले विशेष लकड़ी के ब्लॉक्स भी रहे। विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने इन ब्लॉक्स के माध्यम से स्वयं कपड़े पर ठप्पा लगाकर इस पारंपरिक कला का अनुभव लिया। कई प्रतिनिधियों ने इस अनुभव को यादगार के रूप में अपने साथ भी रखा।

इस तरह बाग प्रिंट केवल एक प्रदर्शित हस्तशिल्प नहीं रहा, बल्कि ब्रिक्स बाज़ार में आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए भारतीय कला और संस्कृति को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का माध्यम भी बना।

धार की विरासत को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

बाग प्रिंट मध्यप्रदेश के धार जिले की विशिष्ट पहचान से जुड़ी पारंपरिक हस्तकला है। प्राकृतिक रंगों और बारीक नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक्स के माध्यम से तैयार होने वाली यह कला अपनी विशिष्ट शैली और पारंपरिक तकनीक के लिए जानी जाती है।

ब्रिक्स बाज़ार में ब्राज़ील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, ईरान, कज़ाखस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, बेलारूस और इथियोपिया सहित विभिन्न देशों से आए शिल्पकारों, अतिथियों और प्रतिनिधियों के बीच बाग प्रिंट का प्रदर्शन मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और शिल्प परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।

मोहम्मद बिलाल खत्री ने कहा कि प्राकृतिक रंगों और बारीक नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक्स से तैयार होने वाला बाग प्रिंट मध्यप्रदेश की पहचान है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों द्वारा इस कला में दिखाई जा रही रुचि और इसकी निर्माण प्रक्रिया को करीब से समझने की उत्सुकता शिल्पकारों के लिए गौरव का विषय है।

भारतीय संस्कृति और शिल्प परंपरा का प्रभावी प्रदर्शन

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में बाग प्रिंट की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत की पारंपरिक कलाएं आज भी वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता रखती हैं। आधुनिक दौर में भी प्राकृतिक रंगों, हाथ से तैयार लकड़ी के ब्लॉक्स और पारंपरिक शिल्प तकनीक का आकर्षण बरकरार है।

ज़हरा पेज़ेशकियान द्वारा बाग प्रिंट की बारीकियों को समझना, स्वयं ठप्पा लगाकर छपाई का अनुभव लेना और पारंपरिक अंगवस्त्रम स्वीकार करना इस बात का प्रतीक है कि भारतीय हस्तशिल्प केवल वस्त्र या कला नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, परंपरा और पीढ़ियों से संजोए गए कौशल की जीवंत अभिव्यक्ति है।

भारत मंडपम में बाग प्रिंट को मिली यह सराहना धार और पूरे मध्यप्रदेश के शिल्पकारों के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस पारंपरिक कला का प्रदर्शन न केवल स्थानीय शिल्प को नई पहचान दे रहा है, बल्कि भारतीय संस्कृति और ‘मेक इन इंडिया’ की रचनात्मक विरासत को भी दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहा है।

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