खंडवा- भगवान विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को राष्ट्रीय श्रमिक दिवस घोषित करने की मांग को लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) जिला खंडवा ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। जिला कलेक्टर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर दिनेश सांवले ने बीएमएस पदाधिकारियों से ज्ञापन प्राप्त किया।
भारतीय मजदूर संघ का कहना है कि भगवान विश्वकर्मा भारतीय परंपरा में श्रम, कौशल, सृजन, निर्माण और तकनीकी दक्षता के प्रतीक माने जाते हैं। देश के निर्माण में श्रमिकों, कारीगरों, शिल्पकारों और विभिन्न क्षेत्रों में अपने हुनर से योगदान देने वाले कामगारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में विश्वकर्मा जयंती के अवसर को श्रमिक सम्मान से जोड़ते हुए 17 सितंबर को राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में घोषित किए जाने की मांग की जा रही है।
श्रम और कौशल को मिले राष्ट्रीय पहचान
बीएमएस जिलामंत्री प्रवीण शर्मा ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की जयंती केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा अवसर नहीं है, बल्कि यह श्रम और सृजन की भारतीय परंपरा को भी रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में श्रमिकों और कारीगरों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए 17 सितंबर को राष्ट्रीय श्रमिक दिवस घोषित करने से श्रम की गरिमा और श्रमिकों के योगदान को व्यापक राष्ट्रीय पहचान मिल सकती है।
जिला अध्यक्ष राजीव मालवीय ने कहा कि यह मांग राष्ट्रहित, उद्योगहित और श्रमिकहित से जुड़ी हुई है। श्रमिक अपने परिश्रम और कौशल के माध्यम से देश के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष दिवस की पहचान होना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
बीएमएस पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार से 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय श्रमिक दिवस घोषित करने की मांग की। संगठन का मानना है कि इससे श्रमिक वर्ग के सम्मान के साथ-साथ युवा पीढ़ी में श्रम, हुनर और तकनीकी दक्षता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में जिला मंत्री प्रवीण शर्मा, जिला अध्यक्ष राजीव मालवीय, जिला सहमंत्री राकेश मालवीय, सुभाष केशोरे, शीला फूलमाली, सविता सिंह, कामिया बघेल, संध्या सूर्यवंशी, अश्विन सैनी सहित भारतीय मजदूर संघ एवं संबद्ध संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बीएमएस ने उम्मीद जताई कि सरकार इस मांग पर विचार करते हुए श्रमिकों और कारीगरों के सम्मान तथा श्रम संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में सकारात्मक पहल करेगी।
