खंडवा- हिंदी दिवस के अवसर पर श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खंडवा के हिंदी विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भाषा के महत्व, हिंदी की वर्तमान स्थिति, उसकी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर सार्थक चर्चा हुई। वक्ताओं ने हिंदी को केवल संवाद का माध्यम न मानते हुए इसे ज्ञान, संस्कृति, परंपरा, संवेदना और वैचारिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया।
कार्यक्रम में खंडवा के वरिष्ठ साहित्यकार एवं व्यंग्यकार श्री कैलाश मंडलेकर ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि भाषा मनुष्य को अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को दूसरों तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी होती है। भाषा के माध्यम से एक पीढ़ी अपने अनुभव, ज्ञान और संस्कार अगली पीढ़ी तक पहुंचाती है।
उन्होंने कहा कि भाषा केवल बोलने अथवा लिखने तक सीमित नहीं है। यह समाज में जागरूकता पैदा करने और सामाजिक बुराइयों एवं कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने का प्रभावी माध्यम भी है। साहित्य और भाषा के माध्यम से समाज को आईना दिखाया जा सकता है तथा आवश्यक बदलाव के लिए जनचेतना पैदा की जा सकती है।
हिंदी की व्यापकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह फरे ने स्वागत वक्तव्य में विद्यार्थियों को वर्तमान समय में हिंदी की स्थिति, उसके सामने मौजूद चुनौतियों और संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को भाषा के निरंतर विकास के साथ बदलते समय और तकनीकी परिवेश के अनुरूप हिंदी के प्रयोग की आवश्यकता बताई।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सोमपाल सिंह ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी वैचारिक पहचान और सांस्कृतिक चेतना की आधारशिला है। हिंदी की शक्ति उसकी व्यापकता के साथ-साथ उसकी संवेदनशीलता, सरलता और विविधता में निहित है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में हिंदी के सामने नई चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन इसके विस्तार की संभावनाएं भी पहले से कहीं अधिक व्यापक हुई हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने हिंदी में ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी हिंदी को केवल पाठ्यक्रम के एक विषय के रूप में न देखे, बल्कि ज्ञान, सृजन, शोध और अभिव्यक्ति के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाए।
युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण
प्राचार्य ने विद्यार्थियों से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग, पठन-पाठन और रचनात्मक लेखन के माध्यम से भाषा को समृद्ध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाषा का भविष्य केवल सरकारी संस्थाओं या साहित्यकारों से तय नहीं होता, बल्कि नई पीढ़ी यह तय करती है कि वह भाषा को अपने दैनिक जीवन, शिक्षा, तकनीक और रचनात्मक अभिव्यक्ति में कितना स्थान देती है।
आज हिंदी के सामने चुनौती केवल दूसरी भाषाओं का प्रभाव नहीं, बल्कि भाषा के शुद्ध, सार्थक और रचनात्मक प्रयोग की भी है। ऐसे में युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए हिंदी के लिए नए अवसर पैदा करें।
विद्यार्थियों ने भी साझा किए विचार
कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र विकास सोलंकी ने आधुनिक परिदृश्य में हिंदी की प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में हिंदी की उपयोगिता को रेखांकित किया।
छात्राओं माया सोलंकी एवं शिवानी मोरे ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ कर कार्यक्रम को साहित्यिक रंग दिया। उनकी कविताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा और हिंदी के प्रति रुचि का परिचय दिया।
हिंदी केवल भाषा नहीं, हमारी सांस्कृतिक विरासत
हिंदी दिवस का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी भाषा के महत्व को समझने और उसके प्रति जिम्मेदारी का बोध कराने का अवसर भी बना। भाषा किसी समाज की स्मृतियों, परंपराओं, विचारों और संवेदनाओं को संजोकर रखती है। इसलिए हिंदी को समृद्ध करना केवल भाषा का विकास नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास भी है।
कार्यक्रम का संचालन दुर्गा नंदमेहर ने किया तथा आभार जीत पालवी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. मौक्षदा जौहरी सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि हिंदी का गौरव केवल हिंदी दिवस मनाने से नहीं, बल्कि उसे जीवन, शिक्षा, साहित्य, शोध और तकनीक के क्षेत्र में निरंतर उपयोग में लाने से बढ़ेगा।
