हरदा- शहर में यातायात व्यवस्था और वाहन चालकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को लेकर यातायात पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है। खेड़ीपुरा क्षेत्र में यातायात पुलिस की कार्रवाई को लेकर विरोध के बाद स्थान बदले जाने की चर्चा है। वहीं, कार्रवाई के तरीके को लेकर स्थानीय वाहन चालकों और नागरिकों की ओर से कई गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर की जा रही शिकायतों में आरोप लगाया जा रहा है कि यातायात पुलिस की कार्रवाई का सबसे अधिक सामना प्रदेश के बाहर से आने वाले वाहन चालकों, सब्जी परिवहन करने वाले वाहनों, स्थानीय किसानों तथा पशु परिवहन से जुड़े वाहन चालकों को करना पड़ रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इनमें से कई वाहन चालक हरदा शहर और जिले के यातायात नियमों अथवा स्थानीय कार्रवाई की प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं होते, जिसके कारण वे कथित तौर पर आसानी से कार्रवाई के दायरे में आ जाते हैं।
चालान की बड़ी राशि बताने के बाद कथित वसूली का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप कथित रूप से चालान की राशि को लेकर लगाए जा रहे हैं। कुछ वाहन चालकों का दावा है कि उन्हें नियम उल्लंघन के नाम पर बड़ी राशि के चालान की बात बताई जाती है। इसके बाद कथित तौर पर बिना विधिवत चालान काटे मौके पर ही राशि लेकर वाहन छोड़ने की शिकायतें सामने आती हैं।
यदि किसी कर्मचारी द्वारा वास्तव में सरकारी चालान प्रक्रिया से बाहर जाकर राशि ली जा रही है, तो यह गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है, इसलिए इनके सही या गलत होने का निर्धारण जांच के बाद ही संभव होगा।
सवाल यह भी है कि यदि किसी वाहन चालक ने यातायात नियम का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार चालान क्यों नहीं काटा जाता? चालान की प्रक्रिया ऑनलाइन अथवा विधिवत रसीद के साथ पूरी होने पर कार्रवाई का रिकॉर्ड भी रहता है और सरकारी राजस्व भी शासन के खाते में जमा होता है।
किसानों और छोटे वाहन चालकों को लेकर चिंता
हरदा कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण बड़ी संख्या में किसान अपने वाहनों से कृषि उपज, सब्जियां और अन्य सामग्री लेकर शहर एवं मंडियों तक पहुंचते हैं। इसी तरह पशु परिवहन और छोटे मालवाहक वाहनों का भी नियमित आवागमन होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों का पालन सभी के लिए जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान किसानों और छोटे वाहन चालकों को नियमों की जानकारी और प्रक्रिया समझाने के साथ विधिवत कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी वाहन में वास्तविक कमी है या यातायात नियम का उल्लंघन हुआ है तो चालान काटना उचित है, लेकिन कथित रूप से मौके पर राशि लेकर छोड़ना व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े करता है।
क्या प्रभावशाली लोगों पर भी होती है समान कार्रवाई?
यातायात पुलिस की कार्रवाई को लेकर दूसरा बड़ा सवाल कार्रवाई की समानता को लेकर उठ रहा है। स्थानीय शिकायतों में आरोप लगाया जा रहा है कि जहां आम वाहन चालक, किसान, सब्जी वाहन और बाहरी नंबर वाले वाहनों के खिलाफ सख्ती की जाती है, वहीं रसूखदार लोगों, राजनीतिक रूप से प्रभाव रखने वाले कथित नेताओं और कुछ कर्मचारियों के यातायात नियमों के उल्लंघन पर अपेक्षाकृत नरमी बरती जाती है।
इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके, यदि ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो यातायात विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए यह समीक्षा का विषय जरूर होना चाहिए कि क्या शहर में चालानी कार्रवाई के लिए सभी वाहन चालकों पर समान मापदंड लागू किए जा रहे हैं।
नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई जरूरी, लेकिन प्रक्रिया भी पारदर्शी हो
यातायात नियमों का पालन कराना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हेलमेट, सीट बेल्ट, ओवरलोडिंग, दस्तावेज, गलत पार्किंग और अन्य यातायात उल्लंघनों के खिलाफ कार्रवाई सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
लेकिन कार्रवाई के साथ पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। किसी वाहन चालक पर जुर्माना बनता है तो उसे विधिवत चालान दिया जाना चाहिए। इससे वाहन चालक को यह स्पष्ट रहता है कि उस पर किस नियम के तहत कार्रवाई हुई और कितनी राशि जमा करनी है।
इसके विपरीत यदि किसी स्तर पर चालान की राशि बताकर कथित रूप से मौके पर ही नकद राशि लेकर वाहन छोड़ने की शिकायत सही पाई जाती है, तो इससे न केवल विभाग की छवि प्रभावित होती है बल्कि सरकारी राजस्व को भी संभावित नुकसान हो सकता है।
खेड़ीपुरा के बाद स्थान बदलने पर भी उठे सवाल
खेड़ीपुरा क्षेत्र में यातायात पुलिस की कार्रवाई को लेकर विरोध के बाद स्थान बदले जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोगों के बाद पुलिस ने अपना स्थान परिवर्तन कर लिया है। यदि पुलिस प्रशासन की ओर से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की जाती है तो इससे सामने आ रही चर्चाओं पर भी विराम लग सकता है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि यातायात पुलिस की कार्रवाई के लिए ऐसे स्थान निर्धारित किए जाएं जहां वाहन जांच सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से हो तथा आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी जरूरी
पूरे मामले में अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि वाहन चालकों की शिकायतें सामने आ रही हैं तो उनकी जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वास्तव में चालानी कार्रवाई किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
यातायात पुलिस द्वारा प्रतिदिन काटे गए चालानों, जमा हुए सरकारी राजस्व और कार्रवाई के स्थानों की नियमित समीक्षा की जा सकती है। इससे यदि कहीं कोई अनियमितता है तो उसे समय रहते सामने लाया जा सकता है।
बड़ा सवाल—क्या कार्रवाई सभी के लिए समान है?
हरदा में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन आम नागरिकों की नजर में व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी मजबूत होगी जब नियम तोड़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर समान कार्रवाई हो और चालान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।
फिलहाल बाहरी वाहन चालकों, किसानों और छोटे वाहन मालिकों की ओर से लगाए जा रहे कथित वसूली के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में हरदा पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष और यदि आवश्यक हो तो निष्पक्ष जांच ही यह स्पष्ट कर सकेगी कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और यातायात पुलिस की कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुरूप हो रही है या नहीं।
अब निगाहें पुलिस प्रशासन की ओर हैं कि इन शिकायतों पर क्या संज्ञान लिया जाता है और चालानी कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का क्या जवाब सामने आता है?
