खंडवा- पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर सद्भावना मंच द्वारा माली कुआं स्थित मंच कार्यालय में क्षमावाणी पर्व श्रद्धा, आत्ममंथन और आपसी सद्भाव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मंच के सदस्यों ने एक-दूसरे से क्षमा मांगकर मन के किसी भी प्रकार के द्वेष और मनमुटाव को दूर करने का संदेश दिया। इस अवसर पर प्रेम, भाईचारे, अहिंसा, क्षमा और सामाजिक सौहार्द को जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में भगवान महावीर के “क्षमा वीरस्य भूषणम्” तथा “जियो और जीने दो” के सिद्धांतों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। उपस्थित सदस्यों ने कहा कि क्षमा मनुष्य के व्यक्तित्व का ऐसा गुण है, जो रिश्तों में आई दूरियों को कम करने के साथ समाज में शांति और सद्भाव का वातावरण निर्मित करता है।
क्षमा केवल परंपरा नहीं, आत्ममंथन का अवसर
सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने कहा कि क्षमावाणी पर्व व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और वर्षभर में जाने-अनजाने हुई गलतियों का आत्ममंथन करने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य से भूल होना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी भूल स्वीकार कर क्षमा मांगना और दूसरों की गलतियों को क्षमा करना समाज को अधिक संवेदनशील और मानवीय बनाता है।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने अहिंसा, क्षमा और ‘जियो और जीने दो’ का जो संदेश दिया, वह केवल किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है। इन मूल्यों को व्यवहार में अपनाकर परिवार, समाज और व्यापक स्तर पर आपसी विश्वास एवं सौहार्द को मजबूत किया जा सकता है।
आपसी संबंधों को मजबूत करने का संदेश
मंच सदस्य कमल नागपाल ने बताया कि क्षमावाणी पर्व के आयोजन का उद्देश्य धार्मिक भावना के साथ-साथ सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को मजबूत करना भी है। कार्यक्रम में सदस्यों ने एक-दूसरे से क्षमा याचना की और संकल्प लिया कि व्यक्तिगत मतभेदों को मन में स्थान न देकर प्रेम, संवाद और सद्भावना को प्राथमिकता दी जाएगी।
वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में छोटी-छोटी बातों को लेकर बढ़ती दूरियां और मनमुटाव रिश्तों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में क्षमा का भाव व्यक्ति को अहंकार और कटुता से दूर कर संबंधों में सहजता लाता है। क्षमा मांगने और क्षमा करने की परंपरा समाज में संवाद और विश्वास की भावना को मजबूत करती है।
प्रेम, अहिंसा और सद्भाव का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि पर्व-त्योहारों का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनसे मिलने वाले मानवीय मूल्यों को दैनिक जीवन में उतारना भी जरूरी है। क्षमावाणी पर्व इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए लोगों को अपने व्यवहार की समीक्षा करने, दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने और आपसी मतभेदों को प्रेमपूर्वक दूर करने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में प्रमोद जैन, सुरेंद्र गीते, देवेंद्र जैन, सुनील सोमानी, अनूप शर्मा, राधेश्याम शाक्य, के.बी. मंसारे, गणेश भावसार, जगदीश चौरे, निमिष भंसाली, रजत सोहनी, कमल नागपाल, नारायण फरकले, योगेश गुजराती, श्वेता हरि सखी, मनीष गुप्ता, अशोक पारवानी, सुभाष मीणा और कैलाश पटेल सहित सद्भावना मंच के सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन क्षमा, अहिंसा, प्रेम और सद्भावना के संदेश के साथ हुआ। सदस्यों ने कहा कि समाज में स्थायी शांति और भाईचारे के लिए जरूरी है कि हम एक-दूसरे की गलतियों को समझें, क्षमा करें और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें।
