पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत बचपन से, छोटे-छोटे प्रयासों से संभव है बड़ा बदलाव: डॉ. अंजना तिवारी

जबलपुर- जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और तेजी से घटते वन क्षेत्र जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। प्रकृति और मानव जीवन का संबंध एक-दूसरे के पूरक का है। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रह सकेगा। इसी सोच को बच्चों तक पहुंचाने और उनमें प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश विद्युत महिला मंडल द्वारा संचालित बालक मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल, रामपुर में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश विद्युत महिला मंडल एवं विद्यालय की अध्यक्ष डॉ. श्रीमती अंजना तिवारी ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय परिसर में पौधारोपण के साथ हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए किसी बड़े अभियान की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक कदम उठाए, जैसे एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना, तो सामूहिक रूप से यह प्रयास धरती को सुरक्षित और हरित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बचपन में सीखे गए संस्कार जीवनभर साथ रहते हैं और यही बच्चे भविष्य में समाज को सही दिशा देने वाले जिम्मेदार नागरिक बनते हैं। इसलिए विद्यालयों में केवल पुस्तकीय शिक्षा ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति प्रेम, संरक्षण और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित की जानी चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर पूरी तरह हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की थीम से सजा हुआ नजर आया। हरे रंग को समृद्धि, हरियाली और जीवन का प्रतीक मानते हुए विद्यार्थियों ने पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। विशेष आकर्षण के रूप में के.जी. विभाग के नन्हे विद्यार्थियों ने हरे परिधानों में “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ” विषय पर लघुनाटिका प्रस्तुत की। बच्चों की मासूम अभिव्यक्ति और संदेशपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया। इसके अलावा विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित कविताओं का पाठ कर प्रकृति के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

विद्यालय के प्राइमरी, मिडिल, हाई एवं हायर सेकेंडरी विभाग के विद्यार्थियों ने ड्राइंग, पोस्टर निर्माण, निबंध लेखन और स्लोगन प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया। रंगों और शब्दों के माध्यम से विद्यार्थियों ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छ पर्यावरण, जैव विविधता और प्लास्टिक मुक्त जीवन जैसे विषयों पर अपनी रचनात्मक सोच प्रस्तुत की। इन प्रतियोगिताओं ने यह स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी पर्यावरणीय चुनौतियों को समझ रही है और उनके समाधान के प्रति गंभीर भी है।

अपने प्रेरक संबोधन में डॉ. अंजना तिवारी ने कहा कि पृथ्वी केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। यदि आज पर्यावरण की रक्षा नहीं की गई तो भविष्य में मानव जीवन के सामने गंभीर संकट खड़े हो सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं, उसकी देखभाल करें और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ समाज की नींव स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण पर ही आधारित होती है।

कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधक श्रीमती वंदना गायकवाड़, प्राचार्या श्रीमती शशिकिरण श्रीवास्तव, महिला मंडल की कोषाध्यक्ष श्रीमती भारती वर्मा, शिक्षिकाएँ, विद्यालय परिवार तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और हरित जीवनशैली को अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों के मन में प्रकृति के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का बीजारोपण करने का एक सार्थक प्रयास भी साबित हुआ। विद्यालय परिवार का मानना है कि यदि प्रत्येक बच्चा पर्यावरण संरक्षण का संदेश अपने घर और समाज तक पहुंचाए, तो हरियाली और स्वच्छता का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले सकता है। ऐसे कार्यक्रम न केवल बच्चों को जागरूक बनाते हैं, बल्कि समाज को भी यह संदेश देते हैं कि पर्यावरण की रक्षा के लिए हर व्यक्ति की भागीदारी अनिवार्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *