उज्जैन- श्रावण-भादौ मास की पावन आध्यात्मिक बेला में धर्मनगरी उज्जैन एक बार फिर शिवमय वातावरण से सराबोर हो उठी। भगवान महाकाल की नगरी में आयोजित ‘शिवतत्व श्रावण कला उत्सव’ के अंतर्गत रविवार को शक्तिपथ पर भक्ति, संगीत और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति और मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के समन्वय से आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक संध्या में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम के दौरान शक्तिपथ का पूरा परिसर शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। मंच से प्रस्तुत हुए भजनों और आध्यात्मिक गीतों ने ऐसा वातावरण निर्मित किया कि श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे। महाकाल की नगरी में आयोजित इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उज्जैन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी है।
लोकधुनों से हुई सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ मालवा अंचल के प्रसिद्ध लोक एवं भजन गायक सुंदरलाल मालवीय की प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने अपनी सुमधुर आवाज और मालवी लोक शैली में भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति भाव से जोड़ दिया। उनकी प्रस्तुतियों ने मालवा की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं की झलक भी प्रस्तुत की, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
इसके पश्चात प्रसिद्ध भजन गायक किशन भगत ने मंच संभाला और एक से बढ़कर एक शिव भजनों की प्रस्तुति दी। उनके भजनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। पूरा परिसर हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोषों से गूंज उठा।
हंसराज रघुवंशी बने कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण
सांस्कृतिक संध्या का सबसे बहुप्रतीक्षित और आकर्षक क्षण तब आया जब प्रसिद्ध शिव भजन गायक हंसराज रघुवंशी मंच पर पहुंचे। उनके मंच पर आते ही श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने लोकप्रिय शिव भजनों और भक्ति गीतों की प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा शक्तिपथ शिव भक्ति के रंग में झूम उठा।
श्रद्धालु उनके गीतों पर हाथ उठाकर नृत्य करते, जयकारे लगाते और भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते दिखाई दिए। उनकी प्रस्तुतियों ने युवा वर्ग से लेकर बुजुर्गों तक सभी को आकर्षित किया। देर तक चलने वाली इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ संस्कृति विभाग की उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला, श्री महाकालेश्वर मंदिर के उप प्रशासक एवं डिप्टी कलेक्टर एस.एन. सोनी तथा उप प्रशासक एवं डिप्टी कलेक्टर सिम्मी यादव द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने उपस्थित कलाकारों का महाकाल वस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान भी किया।
अतिथियों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में संगीत और भक्ति का विशेष महत्व है तथा ऐसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने महाकाल की नगरी में आयोजित इस उत्सव को श्रद्धालुओं और कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया।
श्रद्धालुओं को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा आयोजित ‘शिवतत्व श्रावण कला उत्सव’ का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को भारतीय कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना है। श्रावण और भादौ मास में देशभर से लाखों श्रद्धालु महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में यह उत्सव उन्हें धार्मिक अनुभूति के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत का भी साक्षात्कार कराता है।
आयोजकों के अनुसार उत्सव के अंतर्गत आगामी दिनों में भी विभिन्न सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
भक्ति, संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम
शिवतत्व श्रावण कला उत्सव की यह संध्या भक्ति, संगीत और संस्कृति का ऐसा संगम बनकर सामने आई, जिसने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। भगवान महाकाल की नगरी में गूंजते शिव भजनों ने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया और उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
