खंडवा- इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव के बावजूद रेडियो आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। सूचना, शिक्षा, मनोरंजन और जनजागरण का सशक्त माध्यम रहे रेडियो के प्रति लोगों की इसी आत्मीयता और समर्पण को सम्मान देने के उद्देश्य से हर वर्ष अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन आयोजित किया जाता है। इस वर्ष यह प्रतिष्ठित आयोजन छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगरी भिलाई में 20 अगस्त को आयोजित होगा, जिसमें देशभर से सैकड़ों रेडियो श्रोता भाग लेंगे।
मध्यप्रदेश के खंडवा, इंदौर, सनावद, बड़वाह, रतलाम, उज्जैन, सागर और भोपाल सहित अनेक शहरों से रेडियो प्रेमियों का प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में शामिल होने के लिए रवाना हो चुका है। यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उन लाखों श्रोताओं की भावनाओं का उत्सव है, जिनके जीवन में रेडियो आज भी ज्ञान, प्रेरणा और मनोरंजन का विश्वसनीय साथी बना हुआ है।
श्रोताओं को जोड़ने का अनूठा मंच
मध्यप्रदेश रेडियो श्रोता कल्याण समिति के पदाधिकारियों के अनुसार अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन का उद्देश्य देशभर के रेडियो श्रोताओं को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे अपने अनुभवों, सुझावों और विचारों का आदान-प्रदान कर सकें। रेडियो के प्रति समर्पित श्रोता वर्षों से न केवल कार्यक्रम सुनते हैं, बल्कि अपनी प्रतिक्रियाओं, पत्रों और सुझावों के माध्यम से प्रसारण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह सम्मेलन ऐसे ही समर्पित श्रोताओं को सम्मानित करने और उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करता है। विभिन्न राज्यों और भाषाई क्षेत्रों से आने वाले श्रोताओं का एक मंच पर मिलना भारतीय सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता की सुंदर मिसाल भी प्रस्तुत करता है।
दो दिवसीय आयोजन में संस्कृति और संवाद का संगम
सम्मेलन की शुरुआत 19 अगस्त से होगी। पहले दिन मां सरस्वती के पूजन के साथ कार्यक्रमों का शुभारंभ किया जाएगा। इसके बाद छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी। पंजीयन एवं परिचय सत्र के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रोता एक-दूसरे से परिचित होंगे और रेडियो से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे।
यह सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसमें वर्षों से रेडियो सुनने वाले श्रोताओं को अपने संस्मरण साझा करने का अवसर मिलता है। कई श्रोता ऐसे भी होते हैं जिन्होंने दशकों तक आकाशवाणी के कार्यक्रमों से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस किए हैं। उनके अनुभव नई पीढ़ी को भी रेडियो की उपयोगिता और महत्व से परिचित कराते हैं।
आकाशवाणी उद्घोषकों से होगा सीधा संवाद
20 अगस्त को सम्मेलन के मुख्य सत्र का आयोजन होगा। दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ होने वाले इस सत्र में आकाशवाणी केंद्रों के वरिष्ठ उद्घोषक और प्रसारण जगत से जुड़े विशेषज्ञ श्रोताओं को संबोधित करेंगे। श्रोताओं को यह जानने का अवसर मिलेगा कि कार्यक्रमों की रूपरेखा कैसे तैयार की जाती है और प्रसारण के पीछे कितनी मेहनत एवं रचनात्मकता कार्य करती है।
रेडियो श्रोता सम्मेलन की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें श्रोता और उद्घोषक आमने-सामने संवाद करते हैं। यह संवाद रेडियो और उसके श्रोताओं के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत बनाता है। साथ ही श्रोताओं के सुझाव भविष्य के कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी और जनोपयोगी बनाने में सहायक होते हैं।
समर्पित श्रोताओं का होगा सम्मान
सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए सक्रिय और नियमित रेडियो श्रोताओं का सम्मान भी किया जाएगा। वर्षों से रेडियो कार्यक्रमों को सुनने, उन पर प्रतिक्रिया देने और प्रसारण जगत से सतत जुड़े रहने वाले श्रोताओं को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि रेडियो संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में श्रोताओं की भूमिका की भी स्वीकृति है।
खंडवा की उल्लेखनीय भागीदारी
रेडियो श्रोताओं की सक्रियता के लिए पहचाने जाने वाले खंडवा जिले से भी बड़ी संख्या में श्रोता सम्मेलन में भाग लेने के लिए भिलाई रवाना हुए हैं। इनमें सुभाष खण्डाले, मोहम्मद सादिक, अब्दुल गफ्फार डावर, मोहम्मद रफीक पवार, विजय महोबिया, प्रवीण श्रीमाली, दुर्गा प्रसाद सैनी, योगेश गुजराती, संजय पंचोलिया, शेख मूसा मोहसिन, सुदर्शन शाह, राजेश सेन और चंद्रेश गौहर सहित अनेक रेडियो प्रेमी शामिल हैं।
इन श्रोताओं की उपस्थिति न केवल खंडवा की सक्रिय रेडियो संस्कृति को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि तकनीक के बदलते दौर में भी रेडियो के प्रति लोगों का विश्वास और लगाव कम नहीं हुआ है।
डिजिटल युग में भी कायम है रेडियो की प्रासंगिकता
आज जब सूचना के अनेक आधुनिक साधन उपलब्ध हैं, तब भी रेडियो अपनी विश्वसनीयता, सरलता और व्यापक पहुंच के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है। प्राकृतिक आपदाओं, आपात स्थितियों और ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना पहुंचाने के मामले में रेडियो की भूमिका आज भी बेहद महत्वपूर्ण है। आकाशवाणी के समाचार, कृषि कार्यक्रम, शैक्षणिक प्रसारण, लोक संस्कृति आधारित कार्यक्रम और जनहित संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी रूप से पहुंचते हैं।
अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन इसी तथ्य को रेखांकित करता है कि रेडियो केवल एक प्रसारण माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक जीवंत संवाद है। भिलाई में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन रेडियो के प्रति लोगों की आस्था, समर्पण और प्रेम का राष्ट्रीय उत्सव साबित होगा।
