जनजातीय युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान: वन विभाग के रोजगार मेले में 125 युवाओं का चयन, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

खंडवा- जनजातीय अंचलों के युवाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में खंडवा जिले के खालवा विकासखंड स्थित वनग्राम आंवलिया में रविवार को एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह की पहल पर वन विभाग द्वारा आयोजित रोजगार मेले में विभिन्न प्रतिष्ठित औद्योगिक कंपनियों ने भाग लिया और कुल 125 युवाओं का रोजगार के लिए चयन किया। यह आयोजन केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय युवाओं के कौशल, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत आधार भी सिद्ध हुआ।

जनजातीय उद्यमिता प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास केन्द्र परिसर में आयोजित इस रोजगार मेले का शुभारंभ मुख्य अतिथि मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक वासु कनौजिया, वन मंडलाधिकारी राकेश डामोर, प्रशिक्षु वनमंडलाधिकारी अजय गुप्ता सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवा उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए जनजातीय युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। सरकार की प्राथमिकता है कि जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उनके क्षेत्र के निकट ही उपलब्ध हों।

मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि आज के दौर में केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता और व्यवहारिक कौशल भी सफलता की कुंजी हैं। इसी उद्देश्य से वन विभाग द्वारा संचालित प्रशिक्षण केन्द्रों में युवाओं को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे रोजगार के लिए पूरी तरह सक्षम बन सकें।

वन मंडलाधिकारी राकेश डामोर ने बताया कि रोजगार मेले में कुल 330 प्रशिक्षित युवाओं ने भाग लिया। उनकी योग्यता, तकनीकी दक्षता और साक्षात्कार के आधार पर विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों ने चयन प्रक्रिया पूरी की। एल एंड टी कंपनी ने 30 युवाओं, वर्धमान यार्न्स मंडीदीप ने 20 युवाओं, वेलस्पन कंपनी ने 50 युवाओं तथा सागर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने 25 युवाओं का चयन किया। इस प्रकार कुल 125 युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए, जो जनजातीय क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

रोजगार मेले में शामिल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी प्रशिक्षण केन्द्र में तैयार किए गए युवाओं के कौशल और कार्यक्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि उद्योगों को प्रशिक्षित और अनुशासित मानव संसाधन की आवश्यकता होती है, जिसे यह प्रशिक्षण केन्द्र प्रभावी रूप से तैयार कर रहा है। इससे उद्योगों और युवाओं दोनों को समान रूप से लाभ मिलेगा।

इस आयोजन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उचित मार्गदर्शन और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। वन विभाग द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में संचालित कौशल विकास कार्यक्रम अब रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं और इससे स्थानीय युवाओं का भविष्य अधिक सुरक्षित एवं उज्ज्वल हो रहा है।

रोजगार मेले की सफलता ने यह संदेश दिया कि सरकार, वन विभाग और निजी उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित कर जनजातीय युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे रोजगार मेलों का विस्तार न केवल क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगा। जनजातीय युवाओं के जीवन में आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का यह अभियान भविष्य में विकास की नई इबारत लिखने की क्षमता रखता है।

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