खंडवा। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए खालवा तहसील के ग्राम पटाजन स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्री संदीप यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विद्यालय में निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं के आधार पर की गई है। संभाग आयुक्त इंदौर डॉ. सुदाम खाड़े ने कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता से प्राप्त जांच रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद निलंबन के आदेश जारी किए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं एवं समग्र कार्यप्रणाली की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से एसडीएम हरसूद द्वारा एक विशेष निरीक्षण दल का गठन किया गया था। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आईं। दल ने इन तथ्यों का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपा, जिसके आधार पर प्रकरण को गंभीर मानते हुए तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. नारायण सिंह ने बताया कि प्रभारी प्राचार्य श्री संदीप यादव के निलंबन के पश्चात विद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए विद्यालय में पदस्थ वरिष्ठ शिक्षक श्री हरिश कुमार रजक को प्राचार्य का प्रभार सौंप दिया गया है। इससे विद्यालय का नियमित संचालन पूर्ववत जारी रहेगा और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि शासन और प्रशासन सरकारी विद्यालयों में लापरवाही, अनियमितता और जिम्मेदारियों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की कोताही को गंभीरता से ले रहा है। शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में गुणवत्ता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण और समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई न केवल संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करती है, बल्कि अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश देती है कि शासन की प्राथमिकता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी प्रशासन और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा है।
जिले में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रशासन लगातार विद्यालयों की मॉनिटरिंग कर रहा है। ऐसे में पटाजन विद्यालय में हुई यह कार्रवाई भविष्य में अन्य संस्थानों में भी अनुशासन और उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
