खंडवा- आस्था जब सेवा से जुड़ती है और श्रद्धा जब समाज को एक सूत्र में बांधती है, तब धार्मिक आयोजन केवल उत्सव नहीं रहते, बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना के प्रेरक केंद्र बन जाते हैं। ऐसा ही दिव्य और अविस्मरणीय दृश्य खंडवा के समीप स्थित श्री साईं मंदिर, नागचून में देखने को मिला, जहां मंदिर का 13वाँ स्थापना दिवस श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। दो दिवसीय इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को साईंमय बना दिया।
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 20 जुलाई की रात्रि से ही मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। भव्य साईं जागरण में प्रस्तुत मधुर एवं भावपूर्ण भजनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। पूरी रात “ॐ साईं राम” और साईं भजनों की मधुर स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालु बाबा के चरणों में भावविभोर होकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते रहे। मंदिर परिसर दीपों की रोशनी और आकर्षक सजावट से अलौकिक छटा बिखेर रहा था।

21 जुलाई की प्रातःकालीन महाआरती के साथ स्थापना दिवस के मुख्य अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। आरती के पश्चात साईं बाबा की विशाल पालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग सभी बाबा की पालकी के साथ भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे। पूरे मार्ग पर श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत कर रहे थे। भक्तों के जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
पालकी यात्रा के उपरांत आयोजित विशाल महाप्रसादी (भंडारे) में सेवा और समर्पण की अद्भुत मिसाल देखने को मिली। खंडवा शहर के अलावा आसपास के अनेक गांवों से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भोजन व्यवस्था को अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया, जिससे प्रत्येक श्रद्धालु को सहज और सम्मानपूर्वक प्रसाद प्राप्त हुआ। मंदिर समिति एवं स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन के दौरान निस्वार्थ भाव से सेवा कर साईं बाबा की “सबका मालिक एक” की भावना को साकार किया।

सायंकाल पुनः आयोजित महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात मंदिर के 13वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में केक काटकर सभी श्रद्धालुओं के साथ उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया गया। यह दृश्य केवल उत्सव का नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के अटूट संबंध तथा सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया।
पूरे आयोजन के दौरान मंदिर समिति एवं साईं परिवार ने बाहर से आए श्रद्धालुओं के स्वागत एवं सत्कार में कोई कमी नहीं छोड़ी। उनकी सेवा भावना और आत्मीयता ने प्रत्येक आगंतुक के मन में गहरी छाप छोड़ी। आयोजन की सफलता में साईं परिवार, पांडव ग्रुप, सियाराम ग्रुप तथा समस्त ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी और समर्पित सहयोग विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। सभी ने मिलकर यह सिद्ध किया कि सामूहिक प्रयास और निस्वार्थ सेवा से किसी भी आयोजन को ऐतिहासिक बनाया जा सकता है।

श्री साईं मंदिर नागचून का 13वाँ स्थापना दिवस केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह श्रद्धा, सेवा, सामाजिक समरसता और मानवता के मूल्यों का जीवंत उत्सव बनकर उभरा। इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि साईं बाबा की शिक्षाएं—प्रेम, करुणा, सेवा और समानता—आज भी समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था, स्वयंसेवकों की निस्वार्थ सेवा और मंदिर समिति के उत्कृष्ट प्रबंधन ने इस स्थापना दिवस को अविस्मरणीय बना दिया। यह आयोजन आने वाले वर्षों तक श्रद्धालुओं की स्मृतियों में एक प्रेरणादायी अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
ॐ साईं राम।
