खंडवा वन विभाग में पदोन्नति पर बड़ा विवाद: वरिष्ठता सूची नहीं हुई जारी, दावा-आपत्ति प्रक्रिया भी नहीं अपनाई! | 372 पदों के विरुद्ध 250 पदों पर पदोन्नति आदेश जारी होने से कर्मचारियों में आक्रोश, एससी-एसटी कर्मचारियों ने सीसीएफ को सौंपा विस्तृत आपत्ति-पत्र

खंडवा। वन विभाग के खंडवा वृत्त में वन रक्षक से वनपाल पद पर हुई पदोन्नति प्रक्रिया अब विवादों के केंद्र में आ गई है। 13 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों ने वनसंरक्षक, खंडवा वृत्त श्री वासु कनोजिया को विस्तृत आपत्ति-पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया है कि पदोन्नति प्रक्रिया में मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025, शासन के निर्देशों तथा निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

कर्मचारियों का कहना है कि नियमों की अनदेखी के कारण अनेक पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया है और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

372 पदों के बजाय केवल 250 पदों पर जारी हुए आदेश

आपत्ति-पत्र के अनुसार खंडवा वन वृत्त में वन रक्षक से वनपाल पद पर कुल 372 पदों को भरा जाना था, लेकिन विभाग द्वारा केवल 250 पदों पर ही पदोन्नति आदेश जारी किए गए। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि शेष पदों को रिक्त छोड़ने और पात्र कर्मचारियों को सूची में शामिल नहीं करने से पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

आरक्षण प्रावधानों की अनदेखी का आरोप

कर्मचारियों ने कहा है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के अनुसार अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 प्रतिशत तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित किए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। इसके बाद शेष अनारक्षित पदों पर वरिष्ठता एवं पात्रता के आधार पर कर्मचारियों का चयन किया जाना चाहिए था।

आरोप है कि इसके विपरीत अनारक्षित पदों पर मुख्य रूप से सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति दे दी गई, जबकि पात्र एससी-एसटी कर्मचारियों को सूची से बाहर रखा गया।

त्रुटि क्रमांक-1: वरिष्ठता सूची का नहीं किया गया प्रकाशन

कर्मचारियों ने अपने आवेदन में पहला बड़ा आरोप यह लगाया है कि पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने से पहले वरिष्ठता (वरियता) सूची का प्रकाशन अथवा प्रसारण नहीं किया गया। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार पदोन्नति से पूर्व पात्र कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची जारी की जाती है, ताकि यदि किसी कर्मचारी को सूची में त्रुटि दिखाई दे तो वह समय रहते अपनी आपत्ति दर्ज करा सके।

कर्मचारियों का कहना है कि वरिष्ठता सूची सार्वजनिक नहीं किए जाने से पारदर्शिता प्रभावित हुई और अनेक कर्मचारियों को अपने अधिकारों की जानकारी ही नहीं मिल सकी।

त्रुटि क्रमांक -2: दावा-आपत्ति आमंत्रित नहीं की गई

दूसरा बड़ा आरोप यह है कि विभाग ने दावा-आपत्ति प्रक्रिया का प्रकाशन नहीं किया। सामान्यतः पदोन्नति सूची जारी करने से पहले प्रारंभिक सूची प्रकाशित कर कर्मचारियों से निर्धारित समयावधि में दावा-आपत्ति मांगी जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि, छूट या विसंगति को अंतिम आदेश से पहले सुधारा जा सके।

कर्मचारियों का आरोप है कि इस अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे अंतिम पदोन्नति आदेश जारी कर दिए गए, जो प्रशासनिक पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

वर्ष 2003 से पदोन्नति का इंतजार

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई कर्मचारी वर्ष 2003 से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लंबे समय से विभागीय सेवा देने और सभी पात्रताएं पूरी करने के बावजूद उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिला। इससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

बैतूल वन वृत्त का दिया उदाहरण

आपत्ति दर्ज कराने वाले कर्मचारियों ने वन वृत्त बैतूल का उदाहरण देते हुए कहा है कि वहां पदोन्नति प्रक्रिया में शासन के नियमों, आरक्षण प्रावधानों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। ऐसे में खंडवा वन वृत्त में अलग प्रक्रिया अपनाने के कारणों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

सीसीएफ की भूमिका पर उठे सवाल

पूरे मामले में कर्मचारियों ने वनसंरक्षक (सीसीएफ) श्री वासु कनोजिया से जवाब मांगा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया में नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

उन्होंने मांग की है कि 13 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश का पुनर्विलोकन कर नई सूची जारी की जाए तथा सभी पात्र कर्मचारियों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान किया जाए।

मामला पहुंच सकता है न्यायालय

कर्मचारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी आपत्तियों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च प्रशासनिक स्तर और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में वन विभाग की यह पदोन्नति प्रक्रिया और बड़ा प्रशासनिक एवं कानूनी विवाद बन सकती है।

वन विभाग में जारी पदोन्नति आदेश को लेकर कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में खंडवा वन वृत्त के छह वन मंडलों—खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, सेंधवा, बड़वानी और बड़वाह वन मंडल के करीब 300 कर्मचारी एकत्रित हुए और पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की।

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