जावर बना उद्यानिकी क्रांति का मॉडल गांव: खीरे-टमाटर की खेती से किसानों की बदली तकदीर, दुबई तक पहुंच रही उपज

खंडवा- मध्यप्रदेश का खंडवा जिला अब कृषि क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। जिले का जावर गांव आज उन किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है, जो पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और लाभकारी कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहते हैं। यहां के किसानों ने उद्यानिकी खेती को अपनाकर न केवल अपनी आय में कई गुना वृद्धि की है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में भी सफलता हासिल की है।

शुक्रवार को कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने ग्राम जावर का दौरा कर उन्नत किसान श्री अश्विन बादल सिंह सावले के खेत में खीरे और टमाटर की खेती का निरीक्षण किया। इस दौरान अपर कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा सहित कृषि एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

एक एकड़ से चार लाख रुपये तक की आय

निरीक्षण के दौरान किसान अश्विन सावले ने कलेक्टर को बताया कि उन्होंने आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करते हुए खीरे और टमाटर की फसल से प्रति एकड़ लगभग चार लाख रुपये तक की आय अर्जित की है। उनकी सफलता ने आसपास के किसानों को भी प्रेरित किया है, जिसके परिणामस्वरूप गांव में उद्यानिकी खेती का दायरा तेजी से बढ़ा है।

कलेक्टर श्री गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि आज खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर नई तकनीकों और नकदी फसलों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जहां सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसल से किसान औसतन 30 हजार रुपये प्रति एकड़ की आय प्राप्त करता है, वहीं सब्जी उत्पादन से यह आय कई गुना बढ़कर चार लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है।

आधुनिक तकनीक से बढ़ रही उत्पादकता

कलेक्टर ने किसानों को ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर और मल्चिंग जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पानी की बचत, बेहतर उत्पादन और कम लागत के लिए इन तकनीकों का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। बदलते जलवायु परिदृश्य में वैज्ञानिक खेती ही किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार बन सकती है।

दो एकड़ से शुरू हुआ सफर, 400 एकड़ तक पहुंची खेती

उन्नत किसान अश्विन बादल सिंह सावले की कहानी किसी प्रेरणादायक उदाहरण से कम नहीं है। उन्होंने चार वर्ष पूर्व मात्र दो एकड़ भूमि पर खीरे और टमाटर की खेती शुरू की थी। अच्छी आमदनी मिलने के बाद उन्होंने गांव के अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रोत्साहित किया और एक कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का गठन किया।

आज उनके एफपीओ में 160 किसान सदस्य हैं, जो लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। संगठन से जुड़े किसानों को प्रति एकड़ चार से पांच लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है, जिससे गांव की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

देश के बड़े शहरों से लेकर दुबई तक पहुंच रही उपज

जावर में उत्पादित टमाटर, खीरा, करेला, लौकी और नींबू की मांग अब देश के प्रमुख बाजारों में बढ़ गई है। यहां की सब्जियां मुंबई, नई दिल्ली, लखनऊ, लुधियाना, नोएडा और पठानकोट जैसे शहरों तक पहुंच रही हैं।

सबसे खास बात यह है कि जावर का टमाटर मुंबई के व्यापारियों के माध्यम से दुबई तक निर्यात किया जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल किसान अश्विन सावले की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह साबित करती है कि यदि किसानों को उचित तकनीक, बाजार और संगठनात्मक सहयोग मिले तो ग्रामीण भारत के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना सकते हैं।

सोलर ड्रायर बना किसानों की अतिरिक्त आय का साधन

जावर के किसानों ने फसल प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी नवाचार किया है। किसान अश्विन सावले ने अपने फार्म हाउस में छह सोलर ड्रायर स्थापित किए हैं। इनकी सहायता से करेला, मिर्च, टमाटर, नींबू और आम को सुखाकर उनकी गुणवत्ता बनाए रखते हुए बाजार और निर्यात के लिए तैयार किया जाता है।

विशेष रूप से टमाटर के कम दाम मिलने की स्थिति में उसे सोलर ड्रायर के माध्यम से प्रोसेस कर अधिक कीमत पर बेचा जाता है। इससे किसानों को फसल खराब होने या बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में भी नुकसान नहीं उठाना पड़ता।

जावर बना किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र

जावर गांव की यह सफलता बताती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, उद्यानिकी खेती, सामूहिक प्रयास और बाजार आधारित उत्पादन को अपनाएं तो खेती को अत्यधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। आज जावर न केवल खंडवा जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है, जहां खेती केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन चुकी है।

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