मध्यप्रदेश कैबिनेट के ऐतिहासिक फैसले: समान नागरिक संहिता के विधेयक को मंजूरी, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और श्रम सुधारों पर बड़े निर्णय

भोपाल- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल के जगदीशपुर में आयोजित डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक में मध्यप्रदेश के विकास, सुशासन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी ई-बस से बैठक स्थल पहुंचे। बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के विधेयक को मंजूरी देने से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, श्रम कानून और आधारभूत संरचना से जुड़े अनेक प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

समान नागरिक संहिता के विधेयक को मिली मंजूरी

कैबिनेट की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा “मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी), 2026” के विधेयक को मंजूरी देना रही। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह कानून किसी धर्म या समुदाय के विरुद्ध नहीं है, बल्कि संविधान की समानता और न्याय की भावना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और समाज के सभी वर्गों से इस पहल का समर्थन करने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 27 अप्रैल 2026 को गठित सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति ने विभिन्न राज्यों में लागू व्यवस्थाओं, मौजूदा कानूनों और सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन कर विस्तृत मसौदा तैयार किया। जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 22 मई 2026 को एक विशेष वेब पोर्टल भी शुरू किया गया, जिस पर 9,58,675 सुझाव प्राप्त हुए। इसके अलावा प्रदेशभर में 50 से अधिक जन-परामर्श बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 1,134 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। लगभग 3.5 करोड़ एसएमएस भेजकर भी लोगों की राय ली गई। सरकार के अनुसार 93.54 प्रतिशत लोगों ने मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया।

यूसीसी के प्रमुख प्रावधान

प्रस्तावित संहिता के अनुसार सभी समुदायों में एक पति-एक पत्नी (मोनोगैमी) की व्यवस्था लागू होगी। पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित रहेगी। मौखिक तलाक और अनौपचारिक पंचायतों के तलाक संबंधी निर्णयों को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी। विवाह का समापन केवल कानून में निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा।

संहिता में ‘अवैध संतान’ की अवधारणा समाप्त करते हुए विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी अथवा असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। संपत्ति में महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार सुनिश्चित करने तथा बच्चों की अभिरक्षा के मामलों में उनके सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र को मिली बड़ी सौगात

कैबिनेट ने प्रदेश के 73 स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन के लिए 776 करोड़ 13 लाख रुपये की मंजूरी दी। इसके तहत 29 उप स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 19 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल तथा 7 संस्थानों को 100 बिस्तरीय अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा।

इन संस्थानों के संचालन के लिए 1600 नियमित, 71 संविदा पदों के सृजन और 560 आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई। इस योजना पर प्रतिवर्ष 122.83 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे, जिससे प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी।

चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया स्वरूप

कैबिनेट ने मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026 तथा मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी। इसके तहत अब प्रदेश में दो स्वास्थ्य विश्वविद्यालय संचालित होंगे। जबलपुर स्थित विश्वविद्यालय को विकसित कर चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग, पैरामेडिकल शिक्षा और परीक्षाओं के संचालन को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

उद्योग और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

प्रदेश में निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 को मंजूरी दी गई। इसके तहत उद्योगों और निवेशकों को विभिन्न विभागों से मिलने वाली स्वीकृतियों को एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे निवेश प्रक्रिया तेज और सुगम होगी।

श्रम कानूनों में व्यापक सुधार

कैबिनेट ने मध्यप्रदेश श्रम शक्ति संहिता-2026 को मंजूरी देते हुए छह पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर एकीकृत श्रम कानून लागू करने का निर्णय लिया। नए प्रावधानों के अनुसार उद्योग, रेस्टोरेंट, थिएटर और अन्य प्रतिष्ठानों को 24×7 संचालन, तीन शिफ्ट में कार्य व्यवस्था तथा नए प्रतिष्ठानों के पंजीयन में इंस्पेक्टर सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त करने जैसे सुधार किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उद्योगों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा।

राजमार्ग और आपातकालीन सेवाओं में भी सुधार

कैबिनेट ने अंग्रेजों के समय के पुराने और अप्रासंगिक प्रावधानों को समाप्त करते हुए राजमार्ग कानून में संशोधन को मंजूरी दी। इसके साथ ही मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक-2026 को स्वीकृति प्रदान की गई, जिससे आधुनिक आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

निजी विश्वविद्यालय और अन्य विधेयकों को भी मंजूरी

बैठक में निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 तथा मध्यप्रदेश निरसन विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी गई। इन विधेयकों के माध्यम से उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने तथा अप्रासंगिक कानूनी प्रावधानों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया गया है।

डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक में लिए गए इन फैसलों को मध्यप्रदेश में समान न्याय व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा के आधुनिकीकरण, निवेश को प्रोत्साहन, श्रम सुधारों और प्रशासनिक सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों का उद्देश्य प्रदेश के समग्र विकास को गति देना और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

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