खंडवा- ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक क्षमता में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को जिला पंचायत खंडवा के सभागार में ग्रामीण विकास विभाग की संयुक्त कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिले की चारों जनपद पंचायतों—खंडवा, खालवा, हरसूद एवं बलड़ी—के अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यशाला में जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक यंत्री, उपयंत्री, सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और नवीन प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई।
योजनाओं के प्रभावी संचालन पर दिया गया जोर

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने कहा कि ग्रामीण विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और आमजन तक मूलभूत सुविधाओं को पहुंचाना भी है। उन्होंने अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. नागार्जुन गौड़ा ने कहा कि पंचायतें ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं और योजनाओं की सफलता तभी संभव है, जब स्थानीय स्तर पर उनके संचालन और प्रबंधन में दक्षता और समन्वय हो। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को व्यवहारिक रूप से लागू करने की अपील की।
नल-जल योजनाओं के संचालन एवं प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण
कार्यशाला के दौरान विभागीय प्रशिक्षकों ने ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नियम-2026 की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि जल जीवन मिशन के तहत स्थापित नल-जल योजनाओं का नियमित रखरखाव, जल गुणवत्ता की निगरानी और सामुदायिक भागीदारी इन योजनाओं की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति व्यवस्था को दीर्घकालिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रबंधन तंत्र को मजबूत करना होगा।
वीबी जी रामजी योजना और 16वें वित्त आयोग के प्रावधानों पर चर्चा
कार्यशाला में वीबी जी रामजी योजना के विभिन्न प्रावधानों, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण और रोजगार सृजन से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही 16वें वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायतों को मिलने वाले वित्तीय प्रावधान, अनुदान राशि के उपयोग और विकास कार्यों की प्राथमिकताओं की जानकारी भी दी गई।
प्रशिक्षकों ने बताया कि वित्त आयोग के प्रावधानों का सही उपयोग करके ग्राम पंचायतें पेयजल, स्वच्छता, सड़क, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बना सकती हैं।
पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यशाला पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को नई नीतियों, योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी मिली, जिससे भविष्य में योजनाओं के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएं ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के साथ-साथ ग्रामीण विकास की गति को भी नई दिशा प्रदान करती हैं।
गांवों के समग्र विकास की ओर एक कदम
ग्रामीण नल-जल योजनाओं, वित्तीय प्रबंधन और नई विकास योजनाओं पर केंद्रित यह कार्यशाला जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, योजनाओं के प्रभावी संचालन और ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण विकास की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
