नुक्कड़ नाटक के जरिए गूंजा नशामुक्ति का संदेश, “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान में एनएसएस स्वयंसेवकों ने जगाई जनचेतना

खंडवा- समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और इसके दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खंडवा की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान के अंतर्गत प्रभावशाली जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभियान के तहत महाविद्यालय परिसर और शहर के व्यस्ततम क्षेत्र गायत्री मंदिर बस स्टैंड पर नुक्कड़ नाटक का मंचन कर नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।

नशे के दुष्परिणामों का किया सजीव चित्रण

एनएसएस स्वयंसेवकों ने अपनी सशक्त अभिनय शैली और प्रभावी संवादों के माध्यम से नशे से होने वाले सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। नाटक में दिखाया गया कि नशे की लत किस प्रकार व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति को प्रभावित करती है, पारिवारिक रिश्तों में दरार पैदा करती है और समाज में अपराध एवं असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है।

स्वयंसेवकों ने यह संदेश दिया कि नशा किसी भी व्यक्ति की प्रतिभा, शिक्षा, करियर और भविष्य को नष्ट कर सकता है। इसलिए युवाओं को नशे से दूर रहकर सकारात्मक गतिविधियों, शिक्षा, खेल और समाजसेवा की ओर आगे बढ़ना चाहिए।

बस स्टैंड पर जुटी भीड़, लोगों ने सराहा प्रयास

गायत्री मंदिर बस स्टैंड पर आयोजित नुक्कड़ नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। आम नागरिकों, यात्रियों और युवाओं ने स्वयंसेवकों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया।

नागरिकों का कहना था कि वर्तमान समय में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय है और ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोगों ने महाविद्यालय और एनएसएस इकाई की इस पहल को सराहनीय और समाजोपयोगी बताया।

युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित कर रहे ऐसे कार्यक्रम

कार्यक्रम में उपस्थित महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.पी. सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, “नशामुक्त समाज ही स्वस्थ, नैतिक और ज्ञानवान समाज की आधारशिला है। यदि युवा पीढ़ी नशे से दूर रहेगी, तो देश का भविष्य अधिक सुरक्षित और सशक्त होगा।”

शिक्षकों और अधिकारियों की रही सक्रिय सहभागिता

इस अवसर पर डॉ. गणेश प्रसाद दावरे, डॉ. प्रवीण कुमार पाटिल, डॉ. सुनील कुमार गोयल, डॉ. कुलदीप सिंह फरे, डॉ. मीना साल्वे, प्रो. गजानंद वास्कले, एनएसएस जिला संगठक प्रो. महेश भाबोर, एनएसएस छात्र कार्यक्रम अधिकारी प्रो. राजेश सिसोदिया, एनएसएस छात्रा कार्यक्रम अधिकारी प्रो. राखी उइके, जिला रेडक्रॉस नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कुमार जैन तथा प्रो. रवि किराड़े सहित महाविद्यालय का स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

नशामुक्त समाज के निर्माण का लिया संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर एनएसएस स्वयंसेवकों ने स्वयं नशे से दूर रहने और समाज के अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का सामूहिक संकल्प लिया। उन्होंने यह संदेश दिया कि नशामुक्ति केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।


समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रहे जागरूकता अभियान

“नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान के तहत आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि यदि युवा वर्ग सामाजिक सरोकारों से जुड़कर जनजागरण की जिम्मेदारी निभाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सकती है। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया गया यह संदेश केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त भारत के निर्माण का एक सशक्त प्रयास है।

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