खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: दो उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त, एक के खिलाफ एफआईआर दर्ज

खंडवा- खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर और निर्धारित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। किसानों के हितों की रक्षा और खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से जिले में चलाए जा रहे विशेष निरीक्षण अभियान के तहत कृषि विभाग ने दो उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। इनमें से एक विक्रेता के खिलाफ खाद की कथित कालाबाजारी के मामले में हरसूद थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

शासन के निर्देशानुसार जिले में 1 अप्रैल 2026 से ई-विकास प्रणाली लागू की गई है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि और फसल रकबे के अनुसार अनुशंसित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना, वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और खाद की कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। इसी के तहत सभी उर्वरक विक्रेताओं को ऑनलाइन स्टॉक दर्ज करने, ई-टोकन के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराने और प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड डिजिटल प्रणाली में दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।

कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता के निर्देश पर कृषि विभाग की टीमें जिलेभर में उर्वरक विक्रय केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर रही हैं। साथ ही, दुकानों में उपलब्ध उर्वरकों का भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है, ताकि कहीं भी स्टॉक में गड़बड़ी या अवैध विक्रय की स्थिति सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

इसी क्रम में हरसूद विकासखंड के फीलगुड चौराहा, छनेरा स्थित इनफिनिटी एग्रो का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने अधिकारियों को भी चौंका दिया। ई-विकास पोर्टल पर इस फर्म के पास 194.31 मीट्रिक टन यूरिया तथा आईएफएमएस पोर्टल की पॉइंट ऑफ सेल मशीन में 172.26 मीट्रिक टन यूरिया स्टॉक दर्ज पाया गया। लेकिन जब अधिकारियों ने मौके पर भौतिक सत्यापन किया, तो दुकान में एक भी बोरी यूरिया उपलब्ध नहीं मिली।

इस गंभीर अंतर ने खाद की कालाबाजारी और अनियमित वितरण की आशंका को बल दिया। कृषि विभाग ने इसे किसानों के अधिकारों पर सीधा प्रहार मानते हुए तत्काल सख्त कदम उठाए। उप संचालक कृषि श्री नितेश कुमार यादव के निर्देश पर फर्म संचालक आयुष पाण्डेय के खिलाफ हरसूद थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक श्री गोरेलाल वास्कले द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 की धारा 4, 5, 8 और 35 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 एवं 7 के तहत प्रकरण कायम किया गया है। साथ ही संबंधित फर्म का उर्वरक विक्रय लाइसेंस भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।

कृषि विभाग की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। पुनासा विकासखंड स्थित राजपूत कृषि सेवा केंद्र के निरीक्षण में भी गंभीर अनियमितता सामने आई। जांच में पाया गया कि संबंधित विक्रेता ने शासन द्वारा लागू ई-विकास वितरण प्रणाली का पालन नहीं करते हुए किसानों को बिना ई-टोकन के केवल पॉइंट ऑफ सेल मशीन के माध्यम से 8.415 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया। यह कार्य निर्धारित नियमों के विपरीत पाया गया, जिसके बाद विभाग ने संबंधित विक्रेता का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की।

उप संचालक कृषि श्री नितेश कुमार यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिले में खाद वितरण व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार की अनियमितता, कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा नियमों की अवहेलना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए कृषि विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।

उन्होंने किसानों से भी अपील की कि यदि किसी उर्वरक विक्रेता द्वारा अधिक कीमत वसूलने, बिना ई-टोकन के खाद वितरण करने, निर्धारित मात्रा से कम खाद देने या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिलती है, तो इसकी तत्काल सूचना कृषि विभाग को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सके।

जिले में की गई इस कार्रवाई को प्रशासन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी और खाद की कालाबाजारी तथा अनियमित वितरण पर सख्ती से अंकुश लगाया जाएगा।

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