
कलेक्टर श्री गुप्ता ने कहा कि वन भूमि सार्वजनिक संपत्ति है और इसका संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। शासन की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाने के बाद भी क्षेत्र की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में दोबारा अवैध कब्जा न हो सके।
35 जेसीबी मशीनों से चली कार्रवाई, 9 हजार कंटूर ट्रेंच बनाए गए
वनमंडल अधिकारी श्री राकेश डामोर ने बताया कि अभियान के दौरान लगभग तीन दर्जन जेसीबी मशीनों का उपयोग करते हुए पूरे 105 हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया। कार्रवाई पूरी होने के बाद भविष्य में पुनः अतिक्रमण रोकने तथा वर्षा जल संरक्षण और वन क्षेत्र के पुनर्जीवन को ध्यान में रखते हुए 9,000 बड़े आकार के कंटूर ट्रेंच (गड्ढे) तैयार किए गए।
उन्होंने बताया कि ये कंटूर ट्रेंच वर्षा जल को संरक्षित करने, मिट्टी के कटाव को रोकने तथा पौधों के प्राकृतिक विकास में सहायक होंगे। इससे वन क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
कई जिलों से बुलाया गया वन अमला
वनमंडल अधिकारी ने बताया कि कार्रवाई को सफल बनाने के लिए केवल खंडवा ही नहीं, बल्कि सेंधवा, बड़वानी और खरगोन वन मंडलों से भी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बुलाया गया था। अभियान में कुल 550 वन अधिकारी एवं कर्मचारी तैनात रहे, जिनमें 35 महिला वनकर्मी भी शामिल थीं। सभी टीमों ने समन्वय के साथ कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया।
200 पुलिस जवानों ने संभाला सुरक्षा मोर्चा
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री महेंद्र तारणेकर ने बताया कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 200 पुलिस अधिकारी एवं जवान तैनात किए गए थे। इनमें 14 थाना प्रभारी, तीन राजपत्रित अधिकारी तथा एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शामिल रहे। पुलिस ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था संभालते हुए अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया।
उन्होंने बताया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 के तहत 8 नामजद आरोपियों सहित अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। प्रकरण की जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
घायल वनकर्मियों का अस्पताल पहुंचकर जाना हाल
रविवार को अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान घायल हुए वन विभाग के कर्मचारियों का उपचार जिला अस्पताल में कराया गया। सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल ने बताया कि कुल पांच वनकर्मी घायल हुए थे, जिनमें से तीन के स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि दो कर्मचारियों का उपचार अभी भी जारी है।
सोमवार को कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता एवं पुलिस अधीक्षक श्री अगम जैन जिला अस्पताल पहुंचे और भर्ती कर्मचारियों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए तथा घायल वनकर्मियों का मनोबल बढ़ाते हुए शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं।
वन संरक्षण के लिए प्रशासन की सख्त नीति
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वन भूमि पर अवैध कब्जों के विरुद्ध अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेगा। वन संपदा, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसे सभी मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि वन क्षेत्र केवल सरकारी संपत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की प्राकृतिक धरोहर है, जिसकी रक्षा करना शासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
इस व्यापक अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में वन भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन, वन विभाग और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल के रूप में देखी जा रही है।

