खंडवा- मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। इस बात को निमाड़ की दो होनहार बेटियों ने अपनी शानदार सफलता से साबित कर दिखाया है। किसान परिवार से आने वाली दीक्षा सुरागे ने न केवल विभिन्न विभागों की 11 लिखित प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, बल्कि इस बार मध्यप्रदेश पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) दोनों में चयनित होकर युवाओं के लिए प्रेरणा का नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। दीक्षा ने देश सेवा के अपने संकल्प को आगे बढ़ाते हुए रेलवे सुरक्षा बल में शामिल होने का निर्णय लिया है। वहीं दीक्षा गुर्जर ने भी पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल दोनों में चयन हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
दोनों बेटियों की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर खंडवा के गुरु गोविंद सिंह स्टेडियम में जय हिंद डिफेंस ट्रेनिंग ग्रुप द्वारा उनका भव्य सम्मान किया गया। कार्यक्रम देशभक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। प्रशिक्षु युवाओं ने भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों के बीच दोनों सफल अभ्यर्थियों को कंधों पर उठाकर स्टेडियम से बाहर तक सम्मानपूर्वक विदा किया। यह दृश्य वहां उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया।
असफलता से नहीं टूटी हिम्मत, संघर्ष को बनाया सफलता की सीढ़ी
जय हिंद डिफेंस ट्रेनिंग ग्रुप के संचालक अनिल पाटील ने बताया कि देशगांव निवासी किसान मोहन सुरागे की पुत्री दीक्षा सुरागे ने लगातार कठिन परिश्रम करते हुए विभिन्न विभागों की 11 लिखित परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। पिछली पुलिस भर्ती में उनका चयन होने के बावजूद निर्धारित ऊंचाई (हाइट) पूरी नहीं होने के कारण अंतिम चयन सूची से बाहर होना पड़ा। यह किसी भी अभ्यर्थी के लिए निराशाजनक स्थिति हो सकती थी, लेकिन दीक्षा ने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी और अधिक मजबूत की। परिणामस्वरूप इस बार उन्होंने पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल दोनों में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे असफलता भी टिक नहीं सकती।
दूसरी दीक्षा ने भी बढ़ाया निमाड़ का मान
हरदा निवासी तथा वर्तमान में खंडवा में रह रही दीक्षा गुर्जर ने भी अपने अथक प्रयासों से पुलिस एवं रेलवे सुरक्षा बल दोनों में चयन प्राप्त किया। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, अनुशासित तैयारी और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
सफलता का श्रेय पिता और गुरु को

दीक्षा सुरागे ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और प्रशिक्षक अनिल पाटील को देते हुए कहा कि कठिन समय में पिता ने कभी निराश नहीं होने दिया। उन्होंने हमेशा विश्वास दिलाया कि लगातार प्रयास करने वालों को सफलता अवश्य मिलती है। वहीं पाटील सर ने स्वयं पर विश्वास रखने और दोगुनी मेहनत के साथ लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा दी।
दीक्षा गुर्जर ने भी भावुक होकर बताया कि जब वह असफल हुई थीं, तब अनिल पाटील ने उनसे कहा था—”एक असफलता तुम्हारी काबिलियत तय नहीं करती। हिम्मत रखो, सफलता इतनी बड़ी होगी कि तुम्हें स्वयं तय करना पड़ेगा कि कौन-सी नौकरी चुननी है।” आज यह बात पूरी तरह सच साबित हुई और उनके सामने वास्तव में दो महत्वपूर्ण सेवाओं का विकल्प था।
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षुओं और युवाओं ने दोनों सफल अभ्यर्थियों का जोरदार स्वागत किया। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी सुनकर अनेक युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अधिक समर्पण के साथ करने का संकल्प लिया। समारोह में विनय जायसवाल, मायाराम, हीरमल सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
दोनों बेटियों की उपलब्धि यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी कभी सफलता की राह नहीं रोकती, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और आत्मविश्वास अटूट हो। किसान परिवार से निकलकर राष्ट्रीय सुरक्षा सेवाओं तक पहुंचने का यह सफर न केवल निमाड़, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

