खंडवा- राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय बालिका के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और उसके बाद हुई मृत्यु की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हृदयविदारक घटना के विरोध में खंडवा के सामाजिक संगठन सद्भावना मंच ने गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए दोषियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मंच का कहना है कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा केवल कानून बनाने से सुनिश्चित नहीं होगी, बल्कि कानून का सख्ती से पालन और अपराधियों को समयबद्ध दंड मिलना भी उतना ही आवश्यक है।
बुधवार को सद्भावना मंच कार्यालय में आयोजित शोकसभा में दिवंगत बालिका को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा घटना की निष्पक्ष और शीघ्र जांच की मांग की।
सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने कहा कि देश में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध अत्यंत चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज को पीड़ा पहुंचाती हैं। यदि जघन्य अपराधों में त्वरित न्याय और कठोर दंड सुनिश्चित किया जाए तो अपराधियों के मन में कानून का भय उत्पन्न होगा और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
उन्होंने शासन एवं प्रशासन से आग्रह किया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध लागू सभी प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों, जिनमें पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराएं भी शामिल हों, के तहत प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट में शीघ्र सुनवाई कर दोषियों को कठोरतम दंड दिलाया जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में एक स्पष्ट संदेश जाए कि महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
मंच के सदस्यों ने यह भी कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की भी नैतिक जिम्मेदारी है। परिवार, समाज, शैक्षणिक संस्थानों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से ही ऐसा सुरक्षित वातावरण बनाया जा सकता है, जहां बेटियां भयमुक्त होकर जीवन जी सकें।
मंच के निर्मल मंगवानी ने बताया कि शोकसभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने एक स्वर में मांग की कि मामले में निष्पक्ष जांच के साथ त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए और दोषियों को कानून के अनुसार कठोरतम सजा दी जाए।
इस अवसर पर सुरेंद्र गीते, ओम पिल्लै, जी.डी. सराफ, डॉ. एम.एम. कुरैशी, योगेश गुजराती, निर्मल मंगवानी, मनीष गुप्ता, राजेश पौरपंथ, शैलू मंडलोई, कमल नागपाल, गणेश भावसार, सुभाष मीणा, मनोज जोशी, कैलाश पटेल, धीरज नैगी, नारायण फरकले, संतोष सोनी, मुरली कोडवानी सहित बड़ी संख्या में सद्भावना मंच के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने बालिका को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनों के सख्ती से पालन की आवश्यकता पर बल दिया।
समाज के लिए चेतावनी और जिम्मेदारी
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल कानूनी विषय नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और सामूहिक उत्तरदायित्व का भी प्रश्न है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावी कानून, त्वरित न्याय, जागरूक समाज, पारिवारिक संस्कार और बच्चों की सुरक्षा के प्रति सतर्क व्यवस्था—इन सभी के समन्वित प्रयासों से ही ऐसे जघन्य अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
अस्वीकरण: मामले की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय के निर्णय के अधीन है।

