गुरु पूर्णिमा पर सेवा, समर्पण और सद्भाव का संदेश: सद्भावना मंच ने हजारों श्रद्धालुओं की सेवा कर निभाई सामाजिक जिम्मेदारी

खंडवा- भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा केवल गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व नहीं है, बल्कि सेवा, त्याग और मानवता के आदर्शों को जीवन में उतारने का भी अवसर माना जाता है। इसी भावना को साकार करते हुए खंडवा के सामाजिक संगठन सद्भावना मंच ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर दादाजी धूनीवाले महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं की निस्वार्थ सेवा कर समाज के समक्ष एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।

गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान खंडवा में देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु दादाजी धूनीवाले महाराज के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। ऐसे विशाल धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सद्भावना मंच द्वारा दो प्रमुख स्थानों पर सेवा शिविर स्थापित किए गए। किशोर समाधि के सामने स्थित जैन पेट्रोल पंप परिसर में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल, चाय एवं बिस्कुट प्रसादी की व्यवस्था की गई, वहीं पंधाना नाका स्थित दादाजी वेयरहाउस पर ब्रेड पकोड़े एवं गरमा-गरम भजियों का वितरण किया गया। दिनभर हजारों श्रद्धालुओं ने इस सेवा का लाभ उठाया।

सेवा शिविर का शुभारंभ प्रातः 10 बजे सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन की उपस्थिति में श्री दादाजी महाराज की भोग आरती के पश्चात किया गया। इसके बाद देर शाम तक मंच के स्वयंसेवक पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बावजूद कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बनता था। प्रत्येक श्रद्धालु का मुस्कुराकर स्वागत किया गया तथा उन्हें प्रसादी और पेयजल उपलब्ध कराया गया।

सद्भावना मंच ने बताया कि मंच का उद्देश्य समाज में सेवा, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को सशक्त करना है। धार्मिक आयोजनों में आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करना भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ परंपरा का हिस्सा है। गुरु पूर्णिमा जैसे पावन अवसर पर सेवा का अवसर मिलना मंच के प्रत्येक सदस्य के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि समाज की सच्ची उन्नति तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार जनसेवा में योगदान दे।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह सेवा अभियान केवल प्रसादी वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि श्रद्धालुओं के बीच प्रेम, सहयोग और सामाजिक एकता का संदेश भी प्रसारित करता रहा। मंच के कार्यकर्ताओं ने पूरे आयोजन के दौरान अनुशासित व्यवस्था बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित किया कि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सेवा की यही भावना भारतीय संस्कृति की पहचान है, जहां परोपकार को सर्वोच्च धर्म माना गया है।

इस सेवा अभियान में सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन, ओम पिल्लै, डॉ. जगदीशचंद्र चौरे, डॉ. एम.एम. कुरैशी, देवेंद्र जैन, योगेश गुजराती, अर्जुन बुंदेला, गणेश भावसार, निर्मल मंगवानी, एन.के. दवे, राजेश पौरपंथ, राधेश्याम शाक्य, सुभाष मीणा, त्रिलोक चौधरी, कैलाश पटेल सहित अनेक सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी ने सेवा को ही सर्वोच्च साधना मानते हुए पूरे समर्पण के साथ श्रद्धालुओं की सेवा की।

गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर सद्भावना मंच का यह सेवा अभियान यह संदेश देता है कि धार्मिक आस्था तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ मानव सेवा का भाव जुड़ा हो। निस्वार्थ सेवा, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की यह पहल निश्चित रूप से अन्य सामाजिक संगठनों और युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी तथा समाज में सेवा और सद्भाव की भावना को और अधिक मजबूत करेगी।

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