खंडवा/रोशनी- गुरु पूर्णिमा केवल गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में आस्था, समर्पण और सेवा का जीवंत उत्सव भी है। इसी आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए खंडवा स्थित परम पूज्य श्री दादाजी धूनीवाले दरबार में निशान अर्पित करने के लिए ग्राम रोशनी से श्रद्धालुओं का एक विशाल जत्था शनिवार को भक्ति और उत्साह के साथ पैदल यात्रा पर रवाना हुआ। लगभग 70 किलोमीटर की यह पदयात्रा सोमवार शाम खंडवा पहुंचकर बड़े दादाजी एवं छोटे दादाजी की समाधि पर निशान अर्पित करने के साथ संपन्न होगी।
पदयात्रा की शुरुआत पूरे धार्मिक विधि-विधान और मंगलकामनाओं के साथ हुई। रवाना होने से पहले ग्राम रोशनी में श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया तथा यात्रा की सफलता और क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने हाथों में निशान लेकर जयकारों और भजनों के साथ अपनी यात्रा प्रारंभ की।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु “भजलो दादाजी का नाम, भजलो हरिहरजी का नाम” सहित अनेक भक्ति गीतों का सामूहिक गायन करते हुए आगे बढ़ते रहे। भजनों की मधुर स्वर लहरियों और दादाजी के जयघोष से पूरा मार्ग भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। रास्ते में जहां-जहां से पदयात्रा निकली, वहां स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत कर उन्हें शुभकामनाएं दीं।
सेवा भाव भी बना यात्रा की विशेष पहचान
इस पदयात्रा की सबसे विशेष बात सेवा और सहयोग की भावना रही। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए साबूदाने की खिचड़ी, केले, चाय, पेयजल तथा अन्य प्रसाद सामग्री की व्यवस्था की गई। अनेक सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने भी सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि दादाजी की यात्रा केवल दर्शन तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सेवा, सहयोग और मानवता का संदेश भी देती है।
अच्छी बारिश और समृद्धि की कामना
दादाजी भक्तों ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वे दादाजी के चरणों में निशान अर्पित कर क्षेत्र में अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, किसानों की खुशहाली, परिवारों की सुख-समृद्धि तथा समाज में शांति और सद्भाव की प्रार्थना करेंगे। उनका विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई प्रार्थना सदैव फलदायी होती है।
निमाड़ की आस्था का प्रमुख केंद्र है दादाजी दरबार
खंडवा स्थित श्री दादाजी धूनीवाले दरबार निमाड़ अंचल ही नहीं, बल्कि देशभर के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। विशेष रूप से गुरु पूर्णिमा पर यहां हजारों श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचकर बड़े दादाजी और छोटे दादाजी की समाधि पर माथा टेकते हैं तथा निशान अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हर वर्ष सैकड़ों पदयात्राएं विभिन्न गांवों और शहरों से खंडवा पहुंचती हैं, जो गुरु-भक्ति और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करती हैं।
सोमवार शाम को होगा निशान अर्पण
ग्राम रोशनी से रवाना हुए श्रद्धालु लगभग 70 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा पूरी कर सोमवार शाम खंडवा पहुंचेंगे। इसके बाद वे बड़े दादाजी एवं छोटे दादाजी की समाधि पर श्रद्धापूर्वक निशान अर्पित कर गुरु पूर्णिमा का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
इस पदयात्रा में ग्राम रोशनी के सुधांशु यादव, महेश भालसे, उमेश, बसंत राठौर, सौरभ डोडे, अजय, आकाश विश्वकर्मा, नकुल, मयंक, पीयूष, योगेश एवं अतिन्द्र सहित अनेक दादाजी भक्त शामिल हैं। श्रद्धालुओं में गुरु पूर्णिमा को लेकर गहरा उत्साह, अपार श्रद्धा और सेवा का भाव देखने को मिल रहा है। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता, सेवा और सद्भाव का प्रेरणादायी संदेश भी दे रही है।
