खंडवा- सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान श्री झूलेलाल की आराधना और श्रद्धा को समर्पित पूज्य चालीहा साहब महापर्व के अवसर पर खंडवा का धार्मिक वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा है। 16 जुलाई से प्रारंभ हुए इस 40 दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 23 जुलाई, गुरुवार को शाम 7 बजे श्री झूलेलाल मंदिर, सिंधी कॉलोनी में भगवान श्री झूलेलाल की 108 दीपों से भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
समाजसेवी अनिल सभनानी एवं रजत मंगवानी ने बताया कि यह आयोजन श्री झूलेलाल नवयुवक मंडल एवं श्री झूलेलाल समर्थ पैनल के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम में श्री पूज्य सिंधी पंचायत, सिंधी सेवा मंडली, श्री पिपलेश्वर झूलेलाल भजन मंडली, श्री झूलेलाल महिला मंडल सहित समाज की सभी धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाएं सक्रिय सहभागिता निभा रही हैं। चालीहा साहब महापर्व के दौरान लगातार 40 दिनों तक पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, सत्संग और सेवा कार्यों की श्रृंखला जारी रहेगी।
आयोजकों ने बताया कि गत गुरुवार को पूज्य बाबा स्वरूपदास जी के सान्निध्य में चालीहा साहब महापर्व का शुभारंभ हुआ था। अब आगामी विशेष आयोजन में बालक धाम के पूज्य बाबा माधवदास उदासी के सान्निध्य में भगवान श्री झूलेलाल की 108 दीपों से महाआरती संपन्न होगी। दीपों की अलौकिक रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच होने वाली यह महाआरती श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष अवसर होगी।
पूज्य चालीहा साहब सिंधी समाज का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। इस दौरान श्रद्धालु 40 दिनों तक संयम, साधना, सेवा और भगवान श्री झूलेलाल की आराधना के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और मानव सेवा का संदेश देते हैं। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
आयोजकों ने समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने परिवार सहित श्री झूलेलाल मंदिर, सिंधी कॉलोनी पहुंचकर 108 दीपों से होने वाली इस भव्य महाआरती में सहभागी बनें और भगवान श्री झूलेलाल का आशीर्वाद प्राप्त करें। उनका कहना है कि सामूहिक आराधना और भक्ति से समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है।
पूज्य चालीहा साहब महापर्व के माध्यम से सिंधी समाज अपनी धार्मिक विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं और सेवा भाव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सतत प्रयास कर रहा है। यह आयोजन सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का सशक्त उदाहरण भी बन रहा है।
