खंडवा- लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच खंडवा जिले में मध्यप्रदेश राज्य आपदा आपातकालीन मोचन बल (एसडीईआरएफ) ने ऐसा साहसिक और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसने मानव जीवन की रक्षा के प्रति आपदा प्रबंधन बल की प्रतिबद्धता को एक बार फिर सिद्ध कर दिया। जावर थाना क्षेत्र के हांडीकुंड में सुक्ता और आवना नदी के बीच स्थित एक टापू पर अचानक बढ़े जलस्तर के कारण फंसे चार युवकों को लगभग साढ़े 10 घंटे तक चले कठिन अभियान के बाद शुक्रवार सुबह 4:45 बजे सकुशल सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान खंडवा जिले के इतिहास का अब तक का सबसे कठिन और सफल जल-रेस्क्यू अभियान माना जा रहा है।
अचानक बढ़ा जलस्तर, चारों ओर से घिर गए युवक

डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड आशीष कुशवाहा ने बताया कि गुरुवार शाम करीब छह बजे पुलिस कंट्रोल रूम एवं थाना जावर से सूचना प्राप्त हुई कि चार युवक नदी के बीच स्थित टापू पर फंस गए हैं। लगातार बारिश के कारण सुक्ता और आवना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था, जिससे टापू चारों ओर से तेज बहाव वाली जलधारा से घिर गया। पानी का वेग इतना अधिक था कि युवकों के लिए स्वयं बाहर निकलना असंभव हो गया।
सूचना मिलते ही एसडीईआरएफ खंडवा की टीम कंपनी कमांडर रविंद्र महिवाल के नेतृत्व में तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और बिना समय गंवाए बचाव अभियान शुरू कर दिया।
तेज बहाव ने बढ़ाई चुनौती
रेस्क्यू दल ने प्रारंभिक चरण में सुरक्षा रस्सियों के सहारे मोटरबोट को टापू तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन नदी की तेज धारा और लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण नाव को आगे बढ़ाना अत्यंत जोखिमपूर्ण साबित हुआ। किसी भी प्रकार की जल्दबाजी चारों युवकों और रेस्क्यू टीम के लिए खतरा बन सकती थी। ऐसे में एसडीईआरएफ ने धैर्य, तकनीकी कौशल और रणनीतिक योजना के साथ अभियान जारी रखा।
ड्रोन बना जीवनरक्षक
जब मोटरबोट से पहुंचना संभव नहीं हुआ तो प्रशासन और एसडीईआरएफ ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। ड्रोन के माध्यम से सबसे पहले चारों युवकों तक लाइफ जैकेट पहुंचाई गई, जिन्हें उन्होंने तुरंत पहन लिया। इसके बाद ड्रोन से भोजन और पेयजल भी उपलब्ध कराया गया ताकि पूरी रात वे सुरक्षित रह सकें।
रेस्क्यू टीम ने मोबाइल फोन के माध्यम से युवकों से लगातार संपर्क बनाए रखा। उन्हें हिम्मत बंधाई गई, सुरक्षित स्थान पर बने रहने के निर्देश दिए गए और यह भरोसा दिलाया गया कि हर हाल में उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। पूरी रात संवाद बनाए रखने से युवकों का मनोबल बना रहा।
पूरी रात मौके पर डटा रहा प्रशासन

रेस्क्यू अभियान की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी कलेक्टर डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा, पुलिस अधीक्षक अगम जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तरणेकर, एसडीईआरएफ इंदौर के कंपनी कमांडर रोहन रायकवार, एसडीईआरएफ खंडवा के कंपनी कमांडर रविंद्र महिवाल, पुलिस, होमगार्ड और एसडीईआरएफ के अधिकारी पूरी रात घटनास्थल पर मौजूद रहे।
प्रशासन ने सुकता बांध से अतिरिक्त पानी नहीं छोड़े जाने के लिए संबंधित अधिकारियों से समन्वय किया, जिससे जलस्तर नियंत्रित रखने में सहायता मिली। साथ ही किसी भी आपात स्थिति के लिए एनडीआरएफ उज्जैन की टीम को भी बैकअप के रूप में रवाना कर दिया गया था।
सुबह जलस्तर घटा, फिर शुरू हुआ निर्णायक अभियान
शुक्रवार तड़के जलस्तर में कुछ कमी आने के बाद एसडीईआरएफ खंडवा और इंदौर की संयुक्त टीम ने अंतिम और निर्णायक रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सुरक्षा रस्सियों से नियंत्रित मोटरबोट को प्रचंड जलधारा के बीच सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाया गया।
बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रेस्क्यू दल टापू तक पहुंचा और चारों युवकों को सुरक्षित मोटरबोट में बैठाकर सुबह 4:45 बजे सकुशल बाहर निकाल लिया। अभियान के सफल होते ही मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों, ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली।
एसडीईआरएफ के साहस को मिला जन-जन का सम्मान
रेस्क्यू अभियान की सफलता पर स्थानीय नागरिकों ने एसडीईआरएफ जवानों के साहस, धैर्य, तकनीकी दक्षता और सेवा-भाव की मुक्तकंठ से सराहना की। लोगों ने कहा कि जिस परिस्थिति में चारों युवक फंसे थे, वहां से सुरक्षित निकालना लगभग असंभव प्रतीत हो रहा था, लेकिन एसडीईआरएफ ने अपनी पेशेवर क्षमता और सूझबूझ से असंभव को संभव कर दिखाया।
सुरक्षित बचाए गए युवक
- हुजेफा हामिद (40 वर्ष)
- मयंक उर्फ गोपाल (16 वर्ष)
- अली अजगर
- आयुष (18 वर्ष)
चारों युवक जिला खंडवा के निवासी हैं।
आपदा प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण
यह अभियान केवल चार लोगों की जान बचाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय, आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। एसडीईआरएफ, जिला प्रशासन, पुलिस, होमगार्ड और अन्य एजेंसियों के समन्वित प्रयासों ने साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में त्वरित निर्णय, धैर्य और समर्पण से बड़ी से बड़ी चुनौती का भी सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है।
खंडवा जिले के लिए यह रेस्क्यू अभियान आने वाले समय में आपदा प्रबंधन की एक प्रेरणादायक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।
