जबलपुर- सूचना प्रौद्योगिकी के तेजी से विस्तार और डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता के साथ साइबर अपराध भी लगातार नए और अधिक जटिल रूपों में सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में केवल तकनीकी सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक कर्मचारी और नागरिक का साइबर जागरूक होना भी उतना ही आवश्यक है। विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक अवसंरचना में साइबर सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने अपने शक्ति भवन मुख्यालय, जबलपुर में “साइबर सिक्योर 2026” अभियान के अंतर्गत व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एमपी ट्रांसको के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, डिजिटल दुनिया में मौजूद संभावित खतरों तथा उनसे बचाव के आधुनिक उपायों की जानकारी देना था। इसमें मध्यप्रदेश राज्य साइबर पुलिस, जोन जबलपुर की विशेषज्ञ टीम ने भाग लेकर पावर सेक्टर से जुड़े साइबर जोखिमों और सुरक्षा रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
कार्यक्रम का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक, राज्य साइबर पुलिस श्रीमती उमाकांती आर्मो ने किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी तकनीक का उपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इसलिए किसी भी डिजिटल माध्यम का उपयोग करते समय सतर्कता, जागरूकता और सही जानकारी ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान कर्मचारियों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार, मोबाइल एप्लिकेशन के सुरक्षित उपयोग, मजबूत पासवर्ड बनाने, दो-स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) अपनाने तथा व्यक्तिगत और संस्थागत डेटा की सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपाय बताए गए। इसके अलावा हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, बैंकिंग धोखाधड़ी, फिशिंग लिंक, नकली ई-मेल और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली साइबर ठगी के तरीकों की जानकारी भी विस्तार से दी गई।
साइबर विशेषज्ञ एवं सब-इंस्पेक्टर मोहित पांडे ने ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते साइबर खतरों पर विशेष प्रस्तुति देते हुए कहा कि बिजली पारेषण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं आज पूरी तरह डिजिटल प्रणालियों पर आधारित हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा केवल सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का विषय नहीं रह गई है, बल्कि प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी बन गई है। उन्होंने बताया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, फर्जी कॉल, ई-मेल या साइबर हमले की आशंका होने पर तत्काल संबंधित एजेंसियों को सूचना देना और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में साइबर विशेषज्ञ राज शर्मा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में उभर रहे साइबर खतरों की चर्चा करते हुए बताया कि साइबर अपराधी अब एआई तकनीक का उपयोग कर अधिक विश्वसनीय दिखने वाले फर्जी संदेश, ई-मेल और वेबसाइट तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों को केवल प्रमाणित वेबसाइटों का उपयोग करने, अनजान लिंक पर क्लिक न करने, किसी भी डिजिटल दस्तावेज की सत्यता जांचने तथा भारत सरकार के ‘संचार साथी’ ऐप और पोर्टल जैसे सुरक्षा संसाधनों का उपयोग करने की सलाह दी।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि साइबर अपराध केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि संवेदनशील सूचनाओं की चोरी, पहचान की जालसाजी और महत्वपूर्ण संस्थानों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने का माध्यम भी बन सकते हैं। इसलिए डिजिटल अनुशासन और साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन प्रत्येक कर्मचारी के लिए अनिवार्य है।
कार्यक्रम में एसएलडीसी के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता, एमपी ट्रांसको के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. हिमांशु श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती कल्पना धुर्वे ने किया।
समापन अवसर पर उपस्थित लगभग 150 अधिकारियों और कर्मचारियों ने साइबर सुरक्षा की शपथ लेते हुए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने, साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने तथा अपने कार्यालय और व्यक्तिगत जीवन में साइबर सुरक्षा के सभी आवश्यक नियमों का पालन करने का संकल्प लिया।
डिजिटल परिवर्तन के इस दौर में एमपी ट्रांसको की यह पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्थागत सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे जागरूकता अभियान कर्मचारियों को साइबर जोखिमों से बचाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा को भी नई मजबूती प्रदान करते हैं। बदलते तकनीकी परिवेश में यह संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीक से नहीं, बल्कि जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों तथा कर्मचारियों से सुनिश्चित होती है।

