जबलपुर- आधुनिक तकनीक, कुशल प्रबंधन और सतत अनुरक्षण (मेंटेनेंस) के दम पर मध्यप्रदेश ने बिजली पारेषण के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश की बिजली पारेषण व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत तकनीकी प्रणाली, समयबद्ध निगरानी और समर्पित मानव संसाधन के बल पर प्राकृतिक चुनौतियों के बीच भी निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। इसी का परिणाम है कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की प्रदेशभर की 593 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) ट्रांसमिशन लाइनों ने बिना किसी ब्रेकडाउन के लगातार बिजली पारेषण कर उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित किया है।
इस उपलब्धि में जबलपुर की दो प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों ने विशेष पहचान बनाई है। शहर को विद्युत आपूर्ति करने वाली 132 केवी जबलपुर-बरगी पावर हाउस लाइन तथा 132 केवी जबलपुर-पनागर लाइन पिछले 1500 दिनों, अर्थात लगभग चार वर्षों से बिना किसी ब्रेकडाउन के निरंतर संचालित हो रही हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इनमें से जबलपुर-पनागर लाइन का इतिहास छह दशक से अधिक पुराना है। वर्ष 1964 में ऊर्जीकृत यह लाइन आज भी अपनी विश्वसनीयता और मजबूती का परिचय दे रही है, जबकि जबलपुर-बरगी पावर हाउस लाइन वर्ष 1988 से प्रदेश के विद्युत नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी बनी हुई है।
यह सफलता केवल तकनीकी रिकॉर्ड नहीं, बल्कि पूरे बिजली पारेषण तंत्र की दक्षता और दूरदर्शी योजना का परिणाम है। प्रदेश में पिछले वर्षों के दौरान आंधी, तेज बारिश, बिजली गिरने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद ट्रांसमिशन नेटवर्क को सुचारु बनाए रखना एमपी ट्रांसको के लिए बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद कंपनी ने अपने आधुनिक रखरखाव तंत्र और सक्रिय निगरानी व्यवस्था के बल पर बिजली पारेषण को निर्बाध बनाए रखा।
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर एमपी ट्रांसको के अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उनकी प्रतिबद्धता, तकनीकी दक्षता, अनुशासित कार्यशैली और उत्कृष्ट टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक विश्वसनीय तथा आधुनिक बनाने के लिए निरंतर निवेश और तकनीकी उन्नयन कर रही है। नियमित निरीक्षण, वैज्ञानिक मेंटेनेंस और आधुनिक डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था के कारण प्रदेश की बिजली आपूर्ति प्रणाली लगातार मजबूत हो रही है।
एमपी ट्रांसको ने इस सफलता के पीछे अपनाई गई रणनीतियों का भी उल्लेख किया है। कंपनी द्वारा ट्रांसमिशन लाइनों की नियमित पेट्रोलिंग की जाती है, जिससे संभावित तकनीकी समस्याओं की समय रहते पहचान हो सके। थर्मो-विजन तकनीक के माध्यम से उपकरणों की तापीय स्थिति का परीक्षण कर खराबी की आशंका पहले ही पता लगा ली जाती है। संवेदनशील स्थलों की विशेष निगरानी, प्री-मानसून मेंटेनेंस अभियान, एससीएडीए (SCADA) आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग, लाइन कॉरिडोर का वैज्ञानिक प्रबंधन, पेड़ों की समय पर कटाई-छंटाई तथा इंसुलेटर, कंडक्टर और अन्य हार्डवेयर का निवारक अनुरक्षण इस सफलता के प्रमुख आधार रहे हैं।
इन सभी उपायों ने संभावित ब्रेकडाउन की घटनाओं को काफी हद तक रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिणामस्वरूप ट्रांसमिशन लाइनों की विश्वसनीयता बढ़ी है और बिजली आपूर्ति में अनावश्यक व्यवधान की संभावना न्यूनतम हुई है। इससे न केवल शहरी क्षेत्रों बल्कि ग्रामीण इलाकों, कृषि, उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों को भी निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सुरक्षित और बिना रुकावट अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की यह उपलब्धि प्रदेश की ऊर्जा अवसंरचना की मजबूती का प्रमाण है। यह भविष्य में बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने और स्मार्ट ग्रिड आधारित आधुनिक ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी।
प्रदेश की 593 ईएचवी ट्रांसमिशन लाइनों का यह रिकॉर्ड दर्शाता है कि योजनाबद्ध रखरखाव, आधुनिक तकनीक, सतत निगरानी और समर्पित कार्यबल के समन्वय से बिजली पारेषण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और उपभोक्ता-केंद्रित बनाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में भी इसी मॉडल के माध्यम से मध्यप्रदेश देश के अग्रणी बिजली पारेषण राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

