हाईटेक मेडिकल सप्लाई चेन से बदलेगी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था: हर मरीज तक समय पर पहुंचेगी गुणवत्तायुक्त दवा

भोपाल- मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश के प्रत्येक सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र में जरूरत के अनुसार गुणवत्तायुक्त दवाएं समय पर उपलब्ध हों तथा किसी भी मरीज को आवश्यक दवा के लिए भटकना न पड़े।

इसी उद्देश्य को लेकर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि दवाओं की मांग, खरीद, भंडारण, गुणवत्ता परीक्षण, वितरण और मरीज तक वास्तविक उपलब्धता की पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक, पारदर्शी और डिजिटल तकनीक से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का सबसे महत्वपूर्ण आधार समय पर उपलब्ध गुणवत्तायुक्त दवाएं हैं, इसलिए इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त दवा स्टॉक उपलब्ध रहना चाहिए। किसी भी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की कमी की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। इसके लिए मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा तथा आधुनिक तकनीक की मदद से प्रत्येक स्तर पर निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि मरीजों को दवाओं का वितरण सरल, सुगम और पारदर्शी तरीके से किया जाए ताकि आम नागरिकों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास और मजबूत हो।

बैठक में स्वास्थ्य आयुक्त धनराजू एस ने मेडिकल सप्लाई चेन की प्रस्तावित कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों पर 10 अत्याधुनिक वेयरहाउस स्थापित किए जाएंगे। इन वेयरहाउसों में दवाओं का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से भंडारण किया जाएगा। आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्रत्येक दवा की रियल टाइम ट्रैकिंग की जाएगी, जिससे यह जानकारी हर समय उपलब्ध रहेगी कि कौन-सी दवा कहां उपलब्ध है, कितना स्टॉक शेष है और किस क्षेत्र में कितनी आवश्यकता है।

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि दवाओं की पूरी सप्लाई चेन एंड-टू-एंड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। इससे खरीद से लेकर मरीज तक दवा पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी संभव होगी। स्वास्थ्य विभाग किसी भी समय यह देख सकेगा कि किस अस्पताल में कौन-सी दवा उपलब्ध है, कहां स्टॉक कम हो रहा है और कहां अतिरिक्त आपूर्ति की आवश्यकता है। इससे डिमांड और सप्लाई के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी तथा दवाओं की कमी जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में दवाओं की खरीदी मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से की जाएगी। आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दवाएं सीधे वेयरहाउस तक पहुंचाई जाएंगी, जहां उनका सुरक्षित भंडारण किया जाएगा। इसके बाद सभी दवाओं का एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता परीक्षण कराया जाएगा। गुणवत्ता परीक्षण में सफल होने के बाद ही दवाओं को अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं में वितरण के लिए भेजा जाएगा। इस व्यवस्था से मरीजों को केवल प्रमाणित और गुणवत्तायुक्त दवाएं ही उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

गुणवत्ता परीक्षण के बाद दवाओं का वितरण मेडिकल कॉलेजों, जिला चिकित्सालयों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालयों के औषधि भंडार, सिविल अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक किया जाएगा। आगामी चरण में इस डिजिटल सप्लाई चेन व्यवस्था का विस्तार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक भी किया जाएगा। इतना ही नहीं, मरीज को दवा मिलने की जानकारी भी रियल टाइम में ऑनलाइन दर्ज होगी, जिससे दवा वितरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बन सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव लाएगी। इससे दवाओं की उपलब्धता में सुधार होगा, स्टॉक प्रबंधन अधिक प्रभावी बनेगा, अनावश्यक बर्बादी और कमी पर नियंत्रण होगा तथा मरीजों को समय पर गुणवत्तायुक्त उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। डिजिटल तकनीक और रियल टाइम मॉनिटरिंग के कारण पूरी व्यवस्था अधिक जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनेगी।

बैठक में मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक मयंक अग्रवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी और सरकारी अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता को नई मजबूती प्रदान करेगी।

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