भोपाल- मध्यप्रदेश में प्राकृतिक खेती, गौसंरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को एकीकृत स्वरूप देने की दिशा में बसामन मामा गौवंश वन्य विहार, पुर्वा को एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। इसी उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने वन्य विहार के प्रशासनिक भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर अधोसंरचना विकास, प्राकृतिक खेती के विस्तार, पारदर्शी प्रबंधन, गौवंश संरक्षण और हरित विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परिसर केवल गौवंश के संरक्षण का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि प्राकृतिक खेती, जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायी मॉडल बनेगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती आज देश की कृषि नीति का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता सुरक्षित रहे, किसानों की लागत कम हो और लोगों को रसायनमुक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र का विस्तार करते हुए वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे यहां उत्पादित फसलों और सब्जियों का उत्पादन लगातार बढ़ सके।
उन्होंने कहा कि वन्य विहार में तैयार होने वाली प्राकृतिक सब्जियां, मूंग, गेहूं, चावल तथा अन्य कृषि उत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जाए, ताकि उपभोक्ताओं तक उनकी अलग पहचान बने और प्राकृतिक उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध हो। इसके लिए आधुनिक विपणन प्रणाली विकसित करने के साथ गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और ब्रांड निर्माण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तथा नियमानुसार प्रोडक्शन मैनेजर सहित अन्य आवश्यक पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।
बैठक के दौरान वन्य विहार के प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने शासकीय और अशासकीय सदस्यों की सहभागिता से एक प्रबंधन समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समिति की बैठक प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित की जाए, ताकि विकास कार्यों, वित्तीय प्रबंधन और संचालन व्यवस्था की सतत समीक्षा होती रहे तथा समयबद्ध निर्णय लेकर योजनाओं को गति दी जा सके।
उन्होंने वन्य विहार में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए टीन शेड, पेवर ब्लॉक, आंतरिक सड़क, आधारभूत सुविधाओं तथा अन्य अधोसंरचना कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि बेहतर अधोसंरचना से गौवंश की देखभाल अधिक व्यवस्थित होगी और आगंतुकों के लिए भी परिसर आकर्षक एवं सुविधाजनक बनेगा।
बैठक में लिया गया सबसे महत्वपूर्ण निर्णय मुख्य मार्ग से लेकर बसामन मामा गौवंश वन्य विहार तक पीपल के वृक्षों का व्यापक वृक्षारोपण रहा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पीपल का वृक्ष पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी घनी छाया, दीर्घायु और अधिक ऑक्सीजन प्रदान करने की क्षमता इसे विशेष बनाती है। आने वाले वर्षों में यह मार्ग हरियाली से आच्छादित होकर पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा। उन्होंने कहा कि गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण भारतीय संस्कृति के दो ऐसे आधार हैं, जिन्हें साथ लेकर चलना समय की आवश्यकता है।
वन्य विहार के भ्रमण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती के माध्यम से तैयार लौकी, तरोई सहित अन्य सब्जियों का अवलोकन किया और उनकी गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिना रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के तैयार होने वाले ऐसे उत्पाद न केवल स्वास्थ्यवर्धक हैं, बल्कि भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था की पहचान भी हैं। उन्होंने अधिकारियों को प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोगों का दस्तावेजीकरण कर अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
इसके पश्चात उन्होंने गौवंश शेडों का निरीक्षण कर पशुओं के रखरखाव, चारे-पानी, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूरे परिसर में स्वच्छता, साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना था कि स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण ही गौवंश के बेहतर संरक्षण का आधार है तथा परिसर की व्यवस्थाएं ऐसी हों जो आगंतुकों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनें।
पर्यावरण संरक्षण के संदेश को व्यवहार में उतारते हुए उपमुख्यमंत्री ने वन्य विहार परिसर में आम का पौधा भी रोपा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प है। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
बैठक एवं निरीक्षण के दौरान पूर्व विधायक के.पी. त्रिपाठी, अन्य पिछड़ा वर्ग के जिला अध्यक्ष राजेश यादव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर, एसडीएम दृष्टि जायसवाल, एसडीओ फॉरेस्ट हितेश खंडेलवाल, डॉ. राजेश मिश्रा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में लिए गए ये निर्णय प्रदेश में प्राकृतिक खेती, गौसंरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ तो यह परिसर आने वाले समय में न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश के लिए भी एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।

