खंडवा- बदलती जीवनशैली, बढ़ते मानसिक तनाव और शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता विषयक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का सीधा प्रसारण प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खंडवा में किया गया, जिसमें महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, तनाव प्रबंधन के प्रभावी उपायों से परिचित कराना तथा विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील एवं सकारात्मक वातावरण विकसित करना था। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, कानूनी प्रावधानों, सामाजिक संवेदनशीलता और संवाद आधारित शिक्षण संस्कृति पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।
प्रथम सत्र में प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ डॉ. उषा के. नायर ने चिंता (एंजायटी), पैनिक अटैक, मानसिक तनाव, डिजिटल मीडिया के संतुलित उपयोग, व्यक्तित्व विकार तथा तनाव प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना उतना ही आवश्यक है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना। उन्होंने ब्रीदिंग एक्सरसाइज, सकारात्मक सोच और समय पर परामर्श लेने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। साथ ही टेली मानस, किरण हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन और महिला हेल्पलाइन सहित मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न सरकारी सेवाओं एवं योजनाओं की जानकारी भी दी।
द्वितीय सत्र में डॉ. अमित कुमार सोनी ने शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए पॉक्सो अधिनियम, पॉश अधिनियम, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम, महिला हेल्पलाइन, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजन तथा एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय के प्रति संवेदनशीलता और समावेशी कार्य संस्कृति विकसित करने के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान देने के केंद्र नहीं, बल्कि समानता, सम्मान और संवेदनशीलता के संस्कार विकसित करने के भी प्रमुख माध्यम हैं।

अंतिम सत्र में डॉ. विनय मिश्रा ने विद्यार्थी-केंद्रित, सुरक्षित एवं संवादपूर्ण परिसर के निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच विश्वासपूर्ण संबंध होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसा वातावरण विकसित किया जाना चाहिए, जहाँ विद्यार्थी अपनी व्यक्तिगत अथवा मानसिक समस्याओं को बिना किसी भय या संकोच के शिक्षकों के साथ साझा कर सकें। इससे समय रहते समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा और विद्यार्थियों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सोमपाल सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक सोच, सहयोग की भावना और संवेदनशील वातावरण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने दैनिक व्यवहार और कार्य संस्कृति में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर एनटीईपी की जिला नोडल अधिकारी डॉ. शुचि गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर विशेषज्ञों से परामर्श लेने की अपील की। उन्होंने इस उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण के आयोजन के लिए उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार प्रशिक्षण में समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों में स्वस्थ, सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी सार्थक भूमिका निभाई।

