भोपाल- मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत ई-टोकन बुकिंग के लिए लिए जाने वाले सेवा शुल्क को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लागू किया है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि एमपी ऑनलाइन सेवा केंद्र ई-टोकन बुकिंग के लिए किसानों से अधिकतम 15 रुपये ही सेवा शुल्क वसूल सकेंगे। इससे अधिक राशि लेने पर रोक रहेगी और निर्धारित शुल्क का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
किसानों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मिलेगी राहत
प्रदेश में कृषि उपज खरीदी के दौरान किसानों को ई-टोकन प्राप्त करने के लिए एमपी ऑनलाइन सेवा केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। कई स्थानों से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें सामने आने के बाद सरकार ने इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब किसानों को ई-टोकन बुकिंग के लिए केवल 15 रुपये का निर्धारित सेवा शुल्क ही देना होगा।
1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू है ई-विकास प्रणाली
कृषि विभाग के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से पूरे मध्यप्रदेश में ई-विकास प्रणाली लागू की जा चुकी है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से किसानों को विभिन्न कृषि सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। ई-टोकन बुकिंग भी इसी प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे खरीदी प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है।
शासन स्तर पर तय हुआ सेवा शुल्क
विभाग द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में एमपी ऑनलाइन केंद्रों द्वारा ई-टोकन बुकिंग के लिए 15 रुपये सेवा शुल्क निर्धारित किया गया था। यह शुल्क पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू रहेगा।
कलेक्टरों को दिए गए पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश
कृषि विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने जिलों के एमपी ऑनलाइन सेवा केंद्रों को निर्धारित शुल्क की जानकारी दें तथा यह सुनिश्चित करें कि किसानों से 15 रुपये से अधिक राशि किसी भी स्थिति में न वसूली जाए। साथ ही इस व्यवस्था की नियमित निगरानी भी की जाए ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा या अतिरिक्त आर्थिक भार का सामना न करना पड़े।
डिजिटल व्यवस्था में बढ़ेगा किसानों का भरोसा
सरकार का यह निर्णय किसानों को सस्ती, पारदर्शी और जवाबदेह ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे ई-टोकन बुकिंग प्रक्रिया में एकरूपता आएगी, अनियमितताओं पर रोक लगेगी और किसानों का डिजिटल सेवाओं के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित शुल्क का पालन सभी सेवा केंद्रों के लिए अनिवार्य होगा।

