रीवा में साकार हो रहा भारतीय ज्ञान परंपरा का नया अध्याय: महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय बनेगा संस्कृत शिक्षा और वैदिक अध्ययन का राष्ट्रीय केंद्र

विन्ध्य की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया आयाम, आधुनिक शिक्षा और प्राचीन ज्ञान परंपरा का होगा समन्वय

भोपाल/रीवा- मध्यप्रदेश का विंध्य क्षेत्र सदियों से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और संस्कृत विद्या का प्रमुख केंद्र रहा है। यही समृद्ध विरासत अब एक नए स्वरूप में विकसित होने जा रही है। रीवा में निर्माणाधीन महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का आधुनिक परिसर न केवल संस्कृत शिक्षा को नई दिशा देगा, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक अध्ययन और शोध को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनेगा।

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रविवार को विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर इसकी प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और तकनीकी मानकों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए तथा संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा की।

संस्कृत केवल भाषा नहीं, भारतीय सभ्यता का आधार

निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद, गणित, ज्योतिष, साहित्य और आध्यात्मिक चिंतन की मूल आधारशिला है। इसे देवभाषा का सम्मान प्राप्त है क्योंकि भारत की अधिकांश प्राचीन ग्रंथ परंपरा इसी भाषा में संरक्षित है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति देश और दुनिया में नई रुचि विकसित हो रही है। ऐसे समय में संस्कृत और वैदिक अध्ययन को आधुनिक शोध, तकनीक और उच्च शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

विन्ध्य की ऐतिहासिक पहचान को मिलेगा नया विस्तार

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विंध्य क्षेत्र परंपरागत रूप से संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। आज भी रीवा और आसपास के अनेक गांवों में संस्कृत विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जहां वर्षों से वेद, व्याकरण, दर्शन और शास्त्रों का अध्ययन कराया जा रहा है। महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का आधुनिक परिसर इस गौरवशाली परंपरा को नई ऊर्जा देगा और रीवा की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत अध्ययन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

शोध, नवाचार और रोजगार के नए अवसर

विश्वविद्यालय परिसर विकसित होने के बाद यहां केवल पारंपरिक संस्कृत शिक्षा ही नहीं, बल्कि वैदिक साहित्य, भारतीय दर्शन, योग, आयुर्वेद, पुरातत्व, भारतीय संस्कृति, भाषा विज्ञान और प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान पर अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उच्च स्तरीय शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित नए शोध और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) पर बढ़ते वैश्विक शोध के बीच ऐसा विश्वविद्यालय देश-विदेश के विद्यार्थियों और विद्वानों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर

निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय परिसर का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक भवन निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने अधिकारियों से निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा सभी आवश्यक सुविधाओं को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित करने के निर्देश भी दिए।

भारतीय ज्ञान परंपरा को मिलेगा नया मंच

महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का नया परिसर तैयार होने के बाद यह संस्थान संस्कृत शिक्षा, वैदिक अध्ययन, शोध, प्रकाशन और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यह विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति के उस उद्देश्य को भी साकार करेगा, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के साथ जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है।

रीवा में निर्माणाधीन महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक शिक्षा के समन्वय का प्रतीक बनने जा रहा है। यह परियोजना विंध्य क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ-साथ संस्कृत भाषा, वैदिक ज्ञान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं वैश्विक प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल का निरीक्षण इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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