खंडवा- विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को नगर पालिक निगम खंडवा में भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले नागरिकों को स्मरण करना, विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों के संघर्ष को नमन करना और वर्तमान पीढ़ी को उस दौर की भयावह परिस्थितियों से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम में नगर निगम की महापौर अमृता अमर यादव, नगर निगम अध्यक्ष अनिल विश्वकर्मा, मेयर-इन-काउंसिल (MIC) के सदस्य, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने विभाजन की त्रासदी में दिवंगत नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया।
मौन जुलूस से दिया एकता और सद्भाव का संदेश
श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत नगर निगम प्रांगण से निकाले गए मौन जुलूस के साथ हुई। बिना किसी नारेबाजी के निकाले गए इस जुलूस ने विभाजन की त्रासदी में अपने प्राण गंवाने वाले नागरिकों के प्रति सम्मान और संवेदना का संदेश दिया।
मौन जुलूस के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि देश के इतिहास के इस पीड़ादायक अध्याय को भुलाया नहीं जाना चाहिए। विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा और अनेक परिवारों ने अपनों को खोया। स्मृति दिवस ऐसे ही पीड़ित परिवारों के संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर प्रदान करता है।
सामूहिक रूप से हुआ वंदे मातरम् का गायन
मौन जुलूस नगर निगम प्रांगण में वापस पहुंचने के बाद सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया गया। इस दौरान कार्यक्रम स्थल देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत रहा। उपस्थित जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों ने राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के माध्यम से विभाजन की पीड़ा के बीच देश की एकता और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने का संदेश भी दिया गया।
एलईडी स्क्रीन पर देखी विभाजन की स्मृति सामग्री
कार्यक्रम के अगले चरण में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से विभाजन विभीषिका से संबंधित स्मृति सामग्री एवं प्रस्तुतियों का अवलोकन किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विभाजन के समय की परिस्थितियों, विस्थापन और आम नागरिकों की पीड़ा को सामने रखा गया।
स्मृति सामग्री ने उपस्थित लोगों को इतिहास के उस दौर से जोड़ने का काम किया, जब बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर, संपत्ति और परिचित परिवेश को छोड़कर अनिश्चित परिस्थितियों में जीवन की नई शुरुआत करनी पड़ी थी।
इतिहास से सीख लेकर सामाजिक सद्भाव मजबूत करने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि इतिहास के दर्दनाक अध्यायों को याद करने का उद्देश्य किसी प्रकार की कटुता पैदा करना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। विभाजन की विभीषिका यह संदेश देती है कि सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारा और राष्ट्रीय एकता किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत हैं।
नई पीढ़ी को विभाजन के इतिहास और उससे जुड़े मानवीय पक्ष से परिचित कराना भी ऐसे आयोजनों का महत्वपूर्ण उद्देश्य है, ताकि युवा पीढ़ी देश की एकता एवं अखंडता के महत्व को समझ सके और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाए।
एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में दिवंगत नागरिकों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया। नगर निगम परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम इतिहास के उस दर्दनाक दौर की स्मृतियों को सम्मान देने के साथ वर्तमान पीढ़ी को राष्ट्रहित, भाईचारे और सामाजिक एकता का महत्व समझाने वाला रहा।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि अतीत की पीड़ा को याद रखते हुए देश के वर्तमान और भविष्य को अधिक मजबूत, समरस और एकजुट बनाना ही उन सभी नागरिकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी में अपने प्राण गंवाए या विस्थापन का दर्द सहा।
