मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कर रहे पूरे प्रकरण की मॉनिटरिंग | अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई के निर्देश
सागर- बंडा क्षेत्र में अवैध एवं जहरीली शराब के सेवन से प्रभावित मरीजों के मामले को लेकर प्रदेश सरकार ने गंभीरता दिखाई है। उप मुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) पहुंचकर न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की, बल्कि उपचाररत मरीजों से मुलाकात कर उनका हालचाल भी जाना और चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने बीएमसी के कॉन्फ्रेंस हॉल में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों के साथ पूरे प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। साथ ही जिले में अवैध एवं जहरीली शराब के निर्माण, सप्लाई और बिक्री पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि मामले में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री अस्पताल पहुंचे, मरीजों का जाना हाल
बंडा क्षेत्र की घटना के बाद उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचकर उपचाररत मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से प्रत्येक प्रभावित मरीज की स्थिति, उपचार प्रक्रिया और उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जहरीली शराब से प्रभावित सभी मरीजों को उनकी स्थिति के अनुरूप तत्काल और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए। गंभीर मरीजों की विशेष निगरानी रखी जाए तथा आवश्यक होने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से दवाइयों, जांच, डायलिसिस सहित अन्य आवश्यक उपचार सुविधाओं की उपलब्धता की भी जानकारी ली और मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने देने के निर्देश दिए।
84 मरीजों का चल रहा उपचार
समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने उपचाररत मरीजों की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अवैध शराब से प्रभावित कुल 84 मरीज वर्तमान में उपचाररत हैं। इनमें 59 मरीज बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, 17 मरीज जिला चिकित्सालय और 7 मरीज बंडा सिविल अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं एक गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट कर एम्स भोपाल भेजा गया है।
प्रशासन के अनुसार अधिकांश मरीजों की स्थिति अब स्थिर है। प्रभावित मरीजों के लिए आवश्यक दवाइयां, जांच और डायलिसिस की सुविधा प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही है। अस्पतालों में चिकित्सकीय टीमें लगातार मरीजों की निगरानी कर रही हैं।
अवैध शराब के कारोबार पर पूर्ण रोक के निर्देश
उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि जिले में अवैध शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। इसके लिए सभी शराब दुकानों की जांच करने, उनके स्टॉक की निगरानी करने और अवैध शराब के निर्माण एवं सप्लाई से जुड़े संभावित नेटवर्क की गहन जांच के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि शराब की अवैध बिक्री केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। इसलिए पुलिस, प्रशासन और आबकारी विभाग आपसी समन्वय से कार्रवाई करें और अवैध कारोबार से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचकर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें।
लापरवाही पर जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रकरण में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले की गंभीरता के साथ जांच करने तथा दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए हैं और मामले की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
पुलिस ने गठित की विशेष टीमें, 10 आरोपी अभिरक्षा में
पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग सुजानिया ने समीक्षा बैठक में पुलिस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि थाना बंडा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के विभिन्न प्रावधानों के तहत 20 नामजद आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है।
इसके अतिरिक्त थाना विनायका में भी 10 आरोपियों के विरुद्ध नामजद प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमों का गठन किया है, जो संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
पुलिस के अनुसार बंडा प्रकरण में नामजद 20 आरोपियों में से अब तक 10 आरोपियों को अभिरक्षा में लिया गया है। उनसे पूछताछ कर अवैध शराब के स्रोत, निर्माण, सप्लाई और बिक्री से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपियों की धर-पकड़ और नेटवर्क की जांच लगातार जारी है।
मेथेनॉल की मिलावट की प्रारंभिक जानकारी
कलेक्टर ने बताया कि जहरीली शराब के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में यह जानकारी सामने आई है कि संबंधित शराब बाहर से बनकर सप्लाई हुई थी और इसमें मेथेनॉल की मिलावट पाई गई है।
प्रशासन और पुलिस द्वारा अब इस बात की जांच की जा रही है कि शराब कहां तैयार की गई, किस माध्यम से बंडा क्षेत्र तक पहुंची और इसके निर्माण एवं सप्लाई में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस अधीक्षक को नशा मुक्ति अभियान प्रभावी बनाने के निर्देश
उप मुख्यमंत्री ने पुलिस अधीक्षक को जिले में पुलिस प्रशासन में कसावट लाने के साथ नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध शराब और नशे के कारोबार के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
उन्होंने शराब दुकानों की नियमित जांच और स्टॉक की निगरानी को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
जनप्रतिनिधियों ने की विस्तृत जांच की मांग
समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों ने भी मामले को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने घटना की विस्तृत जांच कराने और यदि किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की उदासीनता या लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की।
उप मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को निष्पक्ष और विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
गंभीर मरीजों का डायलिसिस जारी
डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि प्रभावित मरीजों का उपचार उनकी स्थिति और लक्षणों की तीव्रता के अनुसार किया जा रहा है। मरीजों के अस्पताल पहुंचने की दर में कमी आई है। गंभीर मरीजों का डायलिसिस जारी है और आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार का स्पष्ट संदेश—दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा
बंडा की घटना के बाद उप मुख्यमंत्री द्वारा अस्पताल पहुंचकर मरीजों का हाल जानना और अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा करना सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। एक ओर प्रभावित मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की जांच और दोषियों की धर-पकड़ के लिए पुलिस कार्रवाई तेज की गई है।
उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने स्पष्ट संदेश दिया कि अवैध शराब का कारोबार करने वालों और कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मरीजों के उपचार में किसी भी स्तर पर कमी नहीं रहने दी जाएगी।
