खंडवा, 26 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को पवित्र ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक, सांस्कृतिक और विकास की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे शाम 4:40 बजे इंदौर से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान कर शाम 5:05 बजे ओंकारेश्वर पहुंचेंगे, जहां विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन 27 अगस्त को प्रातः एकात्म धाम परिसर में निर्मित होने वाले भव्य “पंचायतन मंदिर” के शिलान्यास कार्यक्रम में भाग लेकर वापस रवाना होंगे।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है कार्यक्रम
ओंकारेश्वर में बनने वाला पंचायतन मंदिर केवल एक धार्मिक संरचना नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा, अद्वैत दर्शन और आदि शंकराचार्य की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जा रहा है। एकात्म धाम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश सरकार पहले ही एकात्म धाम और ओंकारेश्वर क्षेत्र को महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित करने की मंशा व्यक्त कर चुकी है।
ओंकारेश्वर के विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कई अवसरों पर ओंकारेश्वर को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं। उन्होंने ओंकारेश्वर लोक, एकात्म धाम और शिव पंचायतन मंदिर जैसी परियोजनाओं को प्रदेश की गौरवशाली आध्यात्मिक विरासत से जोड़ते हुए इनके शीघ्र विकास पर जोर दिया है। पंचायतन मंदिर का शिलान्यास इसी व्यापक विकास दृष्टि का हिस्सा माना जा रहा है।
प्रशासन ने पूरी की तैयारियां
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और विभिन्न विभागों द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओं तक सभी पहलुओं की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री के रात्रि प्रवास और शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, संत समाज और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
क्षेत्रवासियों की नजरें शिलान्यास कार्यक्रम पर
धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर में होने वाला यह कार्यक्रम क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि पंचायतन मंदिर के निर्माण से न केवल आध्यात्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे। एकात्म धाम को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में यह शिलान्यास एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
