शिक्षा, कौशल और सामाजिक एकता का अनूठा संगम: देशम् संगठन ने नए सत्र के साथ समाज परिवर्तन का संकल्प दोहराया

भोपाल- समाज में शिक्षा का प्रसार, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और सामाजिक समरसता को मजबूत करना किसी भी प्रगतिशील समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इन्हीं उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में कार्यरत डॉ. आंबेडकर समग्र समाज कल्याण महासंघ (देशम्) ने एक बार फिर समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। संगठन द्वारा संचालित देशम् आदर्श नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस तथा देशम् कौशल विकास कार्यक्रम के नवीन सत्र 2026-27 का शुभारंभ तीन प्रशिक्षण केंद्रों पर उत्साह, अनुशासन और सामाजिक चेतना के वातावरण में किया गया। इस अवसर पर संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक एवं प्रथम महासचिव स्वर्गीय राजेश रंगीले की जयंती को प्रतिवर्ष की भांति “सामाजिक एकता दिवस” के रूप में मनाते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।

यह आयोजन केवल नए प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ नहीं था, बल्कि शिक्षा, समानता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय के मूल्यों के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता का सार्वजनिक संकल्प भी था। कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, महिलाओं, शिक्षकों, समाजसेवियों और संगठन के पदाधिकारियों की बड़ी भागीदारी ने इसे एक सामाजिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।

शिक्षा और कौशल विकास को मिला नया आयाम

देशम् संगठन पिछले कई वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए कक्षा 5वीं से 8वीं तक नि:शुल्क कोचिंग संचालित कर रहा है। इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से नि:शुल्क सिलाई-कढ़ाई एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। नए सत्र के शुभारंभ के साथ संत रविदास नगर (नया बसेरा), संत रविदास मंदिर परिसर (नारियल खेड़ा) तथा हरदा जिले के विकास नगर स्थित तीनों केंद्रों पर नए बैच प्रारंभ हुए।

इन केंद्रों पर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिलाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन का मानना है कि शिक्षा और कौशल विकास ही सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

स्व. राजेश रंगीले की स्मृति में मनाया गया “सामाजिक एकता दिवस”

कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायी पक्ष संगठन के प्रथम महासचिव एवं संस्थापक सदस्य स्वर्गीय राजेश रंगीले को समर्पित रहा। उनके जन्मदिवस को “सामाजिक एकता दिवस” के रूप में मनाते हुए संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके सामाजिक योगदान को याद किया।

संत रविदास नगर स्थित कार्यक्रम में अध्यक्ष रामस्वरूप निमोरे के नेतृत्व में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर, क्रांतिज्योति माता सावित्रीबाई फुले और स्वर्गीय राजेश रंगीले के चित्रों पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों, शिक्षकों, महिलाओं एवं विद्यार्थियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

महिलाओं को मिला सम्मान और आत्मनिर्भरता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण के चौथे बैच की प्रशिक्षित महिलाओं को त्रैमासिक प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके प्रयासों का सम्मान किया गया। यह सम्मान केवल प्रमाण-पत्र वितरण तक सीमित नहीं था, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी था।

इस अवसर पर संगठन की सलाहकार समिति के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. एच.आर. रैदास ने अपने जन्मदिवस पर सभी प्रतिभागियों को मिठाई वितरित कर शुभकामनाएं दीं और शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बताया।

तीनों केंद्रों पर दिखा सामाजिक समरसता का संदेश

नारियल खेड़ा स्थित संत रविदास मंदिर परिसर में महासचिव सेमंतराज बोरीले, वरिष्ठ सदस्य जी.सी. निवारे, उपाध्यक्ष शांति निमोरे तथा अन्य पदाधिकारियों ने बच्चों को टॉफियां वितरित कर नए सत्र की शुरुआत की। कार्यक्रम में शिक्षिकाओं, प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं, विद्यार्थियों और समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों की सहभागिता रही।

उधर हरदा जिले के विकास नगर में जिला अध्यक्ष रामदीन मल्हारे के नेतृत्व में शिक्षा सचिव रामविलास बामने, जिला सचिव गौरीशंकर गन्नौरे तथा रोजगार एवं प्रशिक्षण सचिव अजय बिलारे ने नए सत्र का शुभारंभ किया। यहां भी बच्चों और महिलाओं को शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया।

बाबा साहेब और सावित्रीबाई फुले के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी हथियार बताया था, जबकि माता सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा और समानता की अलख जगाकर समाज में नई चेतना का संचार किया। देशम् संगठन इन्हीं महान विभूतियों के विचारों को आधार बनाकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और स्वावलंबन की रोशनी पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

संगठन का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना या महिलाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से जागरूक, संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नागरिक बनाना है।

समाज परिवर्तन की दिशा में एक सार्थक पहल

आज जब शिक्षा, रोजगार और सामाजिक समरसता जैसी चुनौतियां समाज के सामने हैं, तब देशम् संगठन का यह अभियान एक सकारात्मक और अनुकरणीय पहल के रूप में सामने आया है। नि:शुल्क शिक्षा, महिला कौशल विकास और सामाजिक एकता जैसे तीन महत्वपूर्ण आयामों को एक साथ जोड़कर संगठन ने यह संदेश दिया है कि समावेशी विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से भी संभव है।

नए सत्र के शुभारंभ और “सामाजिक एकता दिवस” के आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि समाज शिक्षा, कौशल और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता दे, तो एक जागरूक, समतामूलक और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का सपना अवश्य साकार हो सकता है। देशम् संगठन का यह प्रयास उसी दिशा में बढ़ाया गया एक सार्थक और प्रेरणादायी कदम माना जा रहा है।

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