खंडवा- श्रावण मास भगवान शिव की आराधना, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का पवित्र पर्व माना जाता है। इसी क्रम में युवा शक्ति खारकलां के नेतृत्व में आयोजित एक दिवसीय डाक कावड़ यात्रा श्रद्धा, समर्पण और युवाओं की धार्मिक चेतना का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई। इस यात्रा में शामिल युवाओं ने न केवल भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की, बल्कि सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश भी दिया।
मंगलवार को दोपहर 2 बजे श्री राम मंदिर खारकलां से प्रारंभ हुई यह डाक कावड़ यात्रा पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ ओंकार जसवाड़ी मंदिर के लिए रवाना हुई। यात्रा के दौरान “हर-हर महादेव”, “बम-बम भोले” और “जय श्री महाकाल” के जयघोषों से वातावरण शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं के उत्साह, अनुशासन और भक्ति ने पूरे मार्ग को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
करीब एक घंटे चालीस मिनट की यात्रा के बाद कावड़िए शाम 3 बजकर 40 मिनट पर ओंकार जसवाड़ी मंदिर पहुंचे, जहां भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक और पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं कल्याण की कामना की।
इस धार्मिक आयोजन में कुल 30 युवाओं ने सहभागिता की। विशेष बात यह रही कि युवाओं ने पूरे आयोजन को अनुशासित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न किया। यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालु शिवभक्ति में लीन दिखाई दिए और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहे।
युवा शक्ति खारकलां के सदस्य राजा मलगाया ने बताया कि डाक कावड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे आयोजन युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं तथा समाज में भाईचारे, सहयोग और एकता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने यात्रा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी ग्रामीणों, युवाओं और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
श्रावण मास में निकलने वाली कावड़ यात्राएं भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रतीक हैं। ये यात्राएं भक्ति के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सामूहिक सहभागिता और धार्मिक चेतना को भी प्रोत्साहित करती हैं। खारकलां की यह डाक कावड़ यात्रा भी इसी भावना को साकार करती नजर आई, जिसमें युवाओं ने पूरे समर्पण और उत्साह के साथ भाग लेकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने इस सफल आयोजन के लिए युवा शक्ति खारकलां की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे, जिससे नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहे और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहे।
हर-हर महादेव। जय श्री महाकाल।
