खंडवा- इतिहास के पन्नों में भले ही अनेक आदिवासी क्रांतिकारियों का उल्लेख सीमित दिखाई देता हो, लेकिन भारत की स्वतंत्रता की नींव उनके अदम्य साहस, संघर्ष और बलिदान से भी मजबूत हुई है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेने वाले महान जननायक वीर रेंगू कोरकू की जयंती बुधवार को खंडवा जिले के सोनखेड़ी में श्रद्धा, सम्मान और गौरव के साथ मनाई गई। समारोह में समाज के वरिष्ठजन, बुद्धिजीवी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में कोरकू समाज के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत वीर रेंगू कोरकू के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने उनके संघर्ष और बलिदान को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने वीर रेंगू कोरकू के जीवन, उनके संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने बताया कि 22 जुलाई 1845 को खंडवा जिले के सोनखेड़ी में जन्मे वीर रेंगू कोरकू बचपन से ही साहसी और स्वाभिमानी थे। वर्ष 1878 में उनकी मुलाकात महान आदिवासी क्रांतिकारी टंट्या भील से हुई, जिसके बाद उन्होंने अंग्रेजी शासन, साहूकारों और जमींदारों के अत्याचारों के खिलाफ छापामार संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारत की आज़ादी में आदिवासी समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। बिरसा मुंडा, टंट्या भील, भीमा नायक, शंकर शाह-रघुनाथ शाह सहित वीर रेंगू कोरकू जैसे अनेक जननायकों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी को इन महान विभूतियों के संघर्ष और बलिदान से परिचित कराया जाए।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं समाजसेवियों का पुष्पमालाओं से स्वागत एवं सम्मान किया गया। वक्ताओं ने शिक्षा के प्रसार, सामाजिक समरसता, संगठन की मजबूती तथा युवाओं को अपने इतिहास और संस्कृति से जोड़ने पर बल दिया।
ग्राम पंचायत सोनखेड़ी के सरपंच श्री तेजराम सिलाले ने बताया कि वीर रेंगू कोरकू केवल कोरकू समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने अंग्रेजी शासन के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और सामाजिक एकता का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का योगदान अतुलनीय रहा है, लेकिन अनेक आदिवासी वीरों को इतिहास में वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तविक हकदार थे। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और महान जननायकों से परिचित कराना है, ताकि युवा उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।
श्री सिलाले ने कहा कि ग्राम पंचायत सोनखेड़ी प्रत्येक वर्ष वीर रेंगू कोरकू की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाती रहेगी तथा उनके संघर्ष, बलिदान और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करेगी। समाज के सभी वर्गों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में आगे आना चाहिए।
कार्यक्रम का समापन वीर रेंगू कोरकू के बताए मार्ग पर चलने, समाज में शिक्षा एवं संगठन को मजबूत बनाने तथा उनके संघर्ष और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल एक महान आदिवासी क्रांतिकारी को श्रद्धांजलि था, बल्कि देश की आज़ादी में आदिवासी समाज के अमूल्य योगदान को स्मरण करने का भी महत्वपूर्ण अवसर बना।
आदिवासी अस्मिता के अमर प्रतीक थे वीर रेंगू कोरकू: सोनखेड़ी में जयंती पर उमड़ा जनसैलाब, देश की आज़ादी में आदिवासी समाज के योगदान को किया गया नमन
