डिजिटल हेल्थ की नई क्रांति: विकसित भारत 2047 की मजबूत आधारशिला बनेगा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, मध्यप्रदेश ने तेज किए क्रियान्वयन के प्रयास

भोपाल- भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के माध्यम से देश में ऐसी डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसमें प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित, सुगम और आवश्यकता पड़ने पर देश के किसी भी कोने में उपलब्ध हो सकेंगे। इसी दिशा में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने स्पष्ट किया है कि एबीडीएम विकसित भारत @2047 के लिए एक मजबूत, नागरिक-केंद्रित और तकनीक आधारित स्वास्थ्य तंत्र की आधारशिला बनेगा।

नई दिल्ली में आयोजित आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के मिशन संचालन समूह (Mission Steering Group) की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में देश ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इस व्यवस्था का लाभ देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे और स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि एबीडीएम के माध्यम से मरीजों को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित, सहमति-आधारित और सरल पहुंच उपलब्ध हो रही है। इससे उपचार की निरंतरता बनी रहती है, चिकित्सकों को मरीज का मेडिकल इतिहास आसानी से उपलब्ध होता है और अनावश्यक जांचों एवं समय की बचत होती है। यह प्रणाली स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

बैठक में राज्यों में मिशन के क्रियान्वयन, स्वास्थ्य संस्थानों एवं स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीयन, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के एकीकरण, निजी अस्पतालों की भागीदारी, क्षमता निर्माण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था डिजिटल तकनीक, डेटा सुरक्षा और नागरिकों की सहमति आधारित सेवाओं पर आधारित होगी।

एबीडीएम का उद्देश्य केवल डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसा एकीकृत स्वास्थ्य नेटवर्क विकसित करना है, जहां मरीज, डॉक्टर, अस्पताल, लैब, फार्मेसी और सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ी हों। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ समय और संसाधनों की भी बचत होगी।

देशभर में तेजी से बढ़ रहा डिजिटल हेल्थ नेटवर्क

देश में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब तक 93.95 करोड़ से अधिक आभा (ABHA) नंबर बनाए जा चुके हैं, जो प्रत्येक नागरिक की डिजिटल स्वास्थ्य पहचान का आधार हैं। इसके अलावा 105 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से लिंक किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री से 5.33 लाख स्वास्थ्य संस्थान और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर जुड़ चुके हैं। वहीं 24 करोड़ से अधिक स्कैन एंड रजिस्टर टोकन जारी किए जा चुके हैं, जिनकी मदद से मरीज अस्पतालों में क्यूआर कोड स्कैन कर आसानी से ओपीडी पंजीयन करा रहे हैं। इससे अस्पतालों में लंबी कतारों में कमी आई है और सेवाएं अधिक तेज एवं पारदर्शी हुई हैं।

मध्यप्रदेश डिजिटल हेल्थ मिशन में तेजी से आगे

बैठक में मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रदेश में एबीडीएम की प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 5.86 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। लगभग 20 हजार स्वास्थ्य संस्थान हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री से और 18 हजार स्वास्थ्य पेशेवर हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं।

प्रदेश के 533 स्वास्थ्य संस्थानों में स्कैन एंड शेयर सुविधा सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इसके माध्यम से अब तक 1 करोड़ 7 लाख 70 हजार से अधिक ओपीडी पंजीयन टोकन जारी किए जा चुके हैं। यह व्यवस्था मरीजों के लिए अस्पतालों में पंजीयन प्रक्रिया को पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और तेज बना रही है।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करेगी, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आधुनिक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।

भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का मजबूत आधार

विशेषज्ञों का मानना है कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में दीर्घकालिक बदलाव का माध्यम है। आने वाले वर्षों में जब मरीज देश के किसी भी हिस्से में इलाज कराएगा, तब चिकित्सक उसकी सहमति से उसका पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड तुरंत देख सकेंगे। इससे बेहतर उपचार, कम खर्च, तेज सेवाएं और स्वास्थ्य प्रणाली में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एबीडीएम स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का प्रमुख आधार बनकर उभर रहा है। केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से यह मिशन न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाएगा, बल्कि करोड़ों नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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