भोपाल/रीवा- स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को नमन करते हुए मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में खुली हवा में सांस ले रहे हैं, वह लाखों वीर स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, तप और सर्वोच्च बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं, बल्कि अनगिनत बलिदानों की अमूल्य विरासत है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का नैतिक दायित्व है।
रीवा के कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम में आयोजित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी परिवार संगठन के सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन विश्व के सबसे बड़े जनआंदोलनों में से एक था। देश के कोने-कोने से लाखों लोगों ने जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। अनेक क्रांतिकारियों ने जेल की यातनाएं सहीं, कई परिवार उजड़ गए और असंख्य वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी, तब जाकर भारत को आजादी मिली।

उन्होंने कहा कि इतिहास केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज की चेतना का हिस्सा बनना चाहिए। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार प्रदेश के सभी जिलों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन, संघर्ष और योगदान को प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित करने की योजना बना रही है, ताकि युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा प्राप्त करे।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अपने संबोधन में विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक भारत को विकसित और विश्वगुरु राष्ट्र बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें अनेक योजनाओं के माध्यम से कार्य कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और यह उपलब्धि देश की सामूहिक शक्ति, नेतृत्व और विकास की गति को दर्शाती है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस विचार का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने 21वीं सदी को भारत की सदी बताया था। श्री शुक्ल ने कहा कि आज देश में हो रहा तीव्र विकास उसी स्वप्न को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रदेश में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के माध्यम से प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा रहा है। प्राकृतिक खेती और गौपालन को बढ़ावा देकर सुरक्षित एवं विषमुक्त कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान, नि:शुल्क राशन, स्वास्थ्य उपचार, बिजली तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा रहा है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों के सम्मान और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने प्रत्येक जिला मुख्यालय पर संगठन के लिए भवन निर्माण, परिवारजनों को सम्मान निधि का लाभ तथा संसद में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार से दो प्रतिनिधियों के नामांकन जैसी मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के वास्तविक इतिहास से जोड़ा जाएगा, तभी राष्ट्रभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना और मजबूत होगी।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भैया बहादुर सिंह को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों का भी सम्मान किया गया। समारोह में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष आलोक चन्द्रसूर्या, संगठन सचिव कपूर सिंह दलाल, परमजीत सिंह, राजा भैया मिश्रा, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. पद्मावती पाण्डेय, श्री प्रसन्न सिंह, श्रीमती ममता पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, सदस्य एवं स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारजन उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की उस विरासत को स्मरण करने का अवसर भी बना, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन देशभक्ति, साहस और त्याग का अनुपम उदाहरण है तथा उनकी प्रेरणा से ही विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

