भोपाल- भारतीय लोककला और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने वाली प्रख्यात पंडवानी गायिका तथा पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। उनके जाने से भारतीय लोक परंपरा ने अपनी एक ऐसी अमूल्य धरोहर खो दी है, जिसने दशकों तक अपनी अद्भुत कला, ओजस्वी वाणी और विलक्षण अभिनय शैली से करोड़ों लोगों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।
मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोककला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपने संपूर्ण जीवन को लोककला की साधना और उसके संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उनकी कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थी, बल्कि भारतीय परंपरा, संस्कृति और लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति थी।
तीजन बाई का नाम पंडवानी गायन की उस विशिष्ट परंपरा का पर्याय बन गया था, जिसमें महाभारत की कथाओं को गीत, संगीत, अभिनय और प्रभावशाली संवाद शैली के माध्यम से जीवंत किया जाता है। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज़, भावपूर्ण प्रस्तुति और मंच संचालन की अनूठी शैली से इस लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके कार्यक्रम केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया, यूरोप, अमेरिका और अनेक अन्य देशों में भी सराहे गए, जिससे भारतीय लोकसंस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने वाली तीजन बाई का जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास और समर्पण की प्रेरक कहानी है। सामाजिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपनी कला का साथ नहीं छोड़ा। अपने अथक परिश्रम और असाधारण प्रतिभा के बल पर उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्ची साधना किसी भी कलाकार को वैश्विक सम्मान दिला सकती है।
भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें क्रमशः पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया। इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत, रंगमंच और लोककला के क्षेत्र में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। उनके सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं थे, बल्कि भारतीय लोक परंपराओं की वैश्विक प्रतिष्ठा के प्रतीक भी थे।
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई की कला और व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा बने रहेंगे। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, शुभचिंतकों और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
तीजन बाई का निधन एक महान कलाकार का अवसान भर नहीं है, बल्कि भारतीय लोककला के इतिहास के एक गौरवशाली अध्याय का समापन भी है। हालांकि उनका शारीरिक रूप से हमारे बीच न रहना निश्चित रूप से एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनकी अमर प्रस्तुतियां, उनकी स्वर-साधना और पंडवानी गायन को नई पहचान दिलाने का उनका योगदान सदैव जीवित रहेगा। भारतीय संस्कृति के इतिहास में उनका नाम एक ऐसी लोकगायिका के रूप में सदैव सम्मान के साथ लिया जाएगा, जिसने अपनी कला के माध्यम से देश की सांस्कृतिक आत्मा को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया।

