खंडवा- गणेश उत्सव केवल आस्था और भक्ति का पर्व नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण तथा भारतीय कला-संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने का अवसर भी है। इसी उद्देश्य को सार्थक करते हुए रोटरी क्लब खंडवा निमाड़ एवं इनरव्हील स्पार्कल द्वारा स्थानीय ललित कला स्कूल में ‘माटी के गणेश’ मूर्ति निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बच्चों को पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाएं बनाने का प्रशिक्षण सुप्रसिद्ध कलाकार एवं शिक्षाविद् शबनम शाह ने दिया।
कार्यशाला में बच्चों ने मिट्टी को आकार देकर भगवान गणेश की छोटी-छोटी प्रतिमाएं स्वयं तैयार कीं। अपने हाथों से बनाई गई प्रतिमाओं को देखकर बच्चों में विशेष उत्साह और खुशी दिखाई दी। मिट्टी से सने हाथों में जब उनकी मेहनत का परिणाम गणेश प्रतिमा के रूप में सामने आया तो शिक्षकगण, आयोजक और प्रतिभागी सभी प्रसन्न नजर आए।
कला कौशल के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता और मूर्ति निर्माण की कला विकसित करने के साथ-साथ उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा। बच्चों को यह संदेश दिया गया कि गणेश उत्सव में मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल विकल्प है।
रोटरी क्लब खंडवा निमाड़ के गोविंद शर्मा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी पर्यावरण के प्रति लगातार जागरूक हो रही है। इस प्रकार की कार्यशालाएं बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के साथ उन्हें मूर्ति कला के कौशल में भी दक्ष बनाने का माध्यम हैं।
इनरव्हील स्पार्कल की अध्यक्ष मोनिका शर्मा ने कहा कि बच्चों की प्रतिभा और रचनात्मकता को मंच देने वाली ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन बड़ी संख्या में किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक बच्चे भारतीय कला परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझ सकें।
गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से गूंजा परिसर
कार्यशाला के दौरान वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना रहा। ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के बीच बच्चों ने सहायक प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में मिट्टी को अलग-अलग आकार देते हुए गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं। इस दौरान उन्हें मूर्ति निर्माण की बारीकियों और प्रतिमा को सुंदर स्वरूप देने की प्रक्रिया से भी परिचित कराया गया।
बच्चों के लिए यह कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि सीखने, सृजन करने और अपनी कला को स्वयं अनुभव करने का अवसर बनी। अपने हाथों से तैयार की गई प्रतिमाओं ने बच्चों के भीतर आत्मविश्वास और रचनात्मक संतुष्टि का भाव भी पैदा किया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ गोविंद शर्मा एवं मोनिका शर्मा ने मां सरस्वती और भगवान गणेश के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित एवं पुष्पार्पण कर किया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध कलाकार एवं शिक्षाविद् शबनम शाह तथा स्कूल निदेशक पिंकी राठौर का उत्तरीय एवं माला से स्वागत किया गया।
कार्यशाला में 40 बच्चों और इनरव्हील स्पार्कल की 25 सदस्यों ने सहभागिता की और मूर्ति कला के विभिन्न पहलुओं को सीखा। कार्यक्रम में संजीव मंडलोई एवं अतुल अत्रिवाल ने भी संबोधित करते हुए इस तरह के रचनात्मक एवं पर्यावरण केंद्रित आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डाला।
शहर के विभिन्न वर्गों की रही सहभागिता
पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण रहा। कार्यशाला में रोटरी क्लब खंडवा निमाड़ से रघुवीर शर्मा, अमीन खान, सुनील बंसल, रोटरी क्लब खंडवा से अनुराग राठौर, इनरव्हील स्पार्कल से ज्योति दुबे, सुदीपा पाराशर, प्रमिला शर्मा, मोना थापक, गीता शर्मा, अलका शर्मा, सुषमा गढ़वाल, संगीता राठौर, संगीत थापक, नूतन शर्मा, दीप्ति थापक एवं शुभा शर्मा उपस्थित रहीं।
इसके अलावा लायंस क्लब खंडवा के राजीव शर्मा एवं लायंस क्लब ग्रेटर के सुरेंद्र सिंह सोलंकी सहित अन्य सदस्य भी कार्यशाला में मौजूद रहे।
मिट्टी की प्रतिमा, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी
‘माटी के गणेश’ जैसी पहल धार्मिक आस्था को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है। बच्चों को कम उम्र में ही प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने और उत्सवों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से मनाने की सीख देने में ऐसी गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यशाला ने यह संदेश भी दिया कि परंपरा और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यदि गणेश उत्सव में मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा दिया जाए और समाज में पर्यावरण अनुकूल उत्सव की संस्कृति विकसित की जाए तो धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाई जा सकती है।
कार्यक्रम का संचालन अनुराग राठौर ने किया तथा आभार पिंकी राठौर ने व्यक्त किया।
