कृष्ण के प्रसंगों में छिपा है पर्यावरण, जीव-दया और सामूहिक सुरक्षा का संदेश : राजेंद्र शुक्ल | यादव महासभा के श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री, बोले- गीता का ज्ञान जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शन

रीवा- भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम में अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शामिल हुए। इस अवसर पर समाज के प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उपरांत विधि-विधान से पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र, उनकी लीलाओं और श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन केवल आस्था और भक्ति का विषय नहीं है, बल्कि उनके जीवन के प्रत्येक प्रसंग में मानव जीवन, समाज, प्रकृति और कर्तव्य से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश निहित हैं।

कर्म और भक्ति का मार्ग दिखाती है गीता

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मानव जीवन को कर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। श्रीमद्भगवद्गीता में दिया गया निष्काम कर्म का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। मनुष्य को अपने कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन करना चाहिए और परिणाम की चिंता किए बिना धर्म एवं सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि रामलीला और कृष्णलीला केवल धार्मिक कथाएं नहीं हैं, बल्कि ये ऐसी जीवंत प्रेरणाएं हैं, जो विषम परिस्थितियों में भी धर्मनिष्ठ जीवन जीने का मार्ग दिखाती हैं। श्रीकृष्ण का जीवन संघर्ष, धैर्य, रणनीति, कर्तव्य और लोककल्याण की भावना का उदाहरण है।

अधर्म के विरुद्ध सजग और संगठित रहने का आह्वान

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को अधर्म और दुष्ट प्रवृत्तियों से बचाने के लिए केवल भावनात्मक रूप से नहीं, बल्कि सतर्कता, धैर्य, विवेक, कूटनीति और नैतिक संकल्प शक्ति के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि नकारात्मक और उपद्रवी तत्व केवल वर्तमान समय की समस्या नहीं हैं। द्वापर और त्रेता युग में भी समाज को ऐसी प्रवृत्तियों का सामना करना पड़ा। शिशुपाल जैसे पात्र मर्यादा की सीमाओं का उल्लंघन करते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने समय और परिस्थिति के अनुरूप धर्म एवं न्याय की रक्षा के लिए निर्णय लिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी समाज को गलत प्रवृत्तियों से निराश होने के बजाय जागरूक और संगठित रहना चाहिए। धर्म और न्याय की रक्षा के लिए शांति और सद्भाव के साथ आवश्यक दृढ़ता का होना भी जरूरी है।

कृष्ण की लीलाओं में पर्यावरण संरक्षण का संदेश

उप मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को पर्यावरण संरक्षण और जीव-दया से जोड़ते हुए कहा कि कंस वध, कालिया नाग का दमन और गोवर्धन पर्वत धारण जैसे प्रसंग अपने भीतर व्यापक सामाजिक संदेश समेटे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि गोवर्धन पर्वत धारण का प्रसंग विशेष रूप से सामूहिक सुरक्षा और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। जब ब्रजवासियों और गौमाता पर संकट आया, तब श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा की। इस प्रसंग में मानव, गौवंश और प्रकृति के बीच के संबंध को समझने की प्रेरणा मिलती है।

इसी प्रकार कालिया नाग के दमन के प्रसंग को उन्होंने प्रकृति और जल स्रोतों को प्रदूषण से मुक्त रखने की चेतना से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति की रक्षा को सदैव महत्वपूर्ण माना गया है।

गौ माता के प्रति श्रीकृष्ण का विशेष प्रेम

उप मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के गौ प्रेम का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन गौ सेवा और गौ संरक्षण की भारतीय परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि गौ माता के प्रति सम्मान भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के इसी गौ प्रेम को ध्यान में रखते हुए पहले बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में गौ सेवकों के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। उन्होंने कहा कि गौ सेवा के माध्यम से प्रकृति, कृषि और ग्रामीण जीवन से जुड़े अनेक आयामों को मजबूत किया जा सकता है।

प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान यादव समाज के प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवा पीढ़ी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की समझ भी विकसित करनी चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और चरित्रवान नागरिक तैयार करना भी है।

समाज को संगठित और जागरूक बनाने का संदेश

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने उपस्थित समाजजनों से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन को अपने व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित, जागरूक और धर्मनिष्ठ बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होना होगा।

उन्होंने कहा कि एक बेहतर समाज के लिए शांति, सद्भाव और भाईचारे के साथ अन्याय एवं अधर्म के विरुद्ध खड़े होने का साहस भी आवश्यक है। श्रीकृष्ण का जीवन इसी संतुलन की प्रेरणा देता है—जहां प्रेम और करुणा है, वहीं अन्याय के प्रतिकार के लिए दृढ़ संकल्प भी है।

मध्यरात्रि में हुआ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

कार्यक्रम में मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव विधि-विधान से मनाया गया। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का क्षण आया, पूरा सभागार भक्तिभाव से भर गया और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।

समारोह में सांसद जनार्दन मिश्र, पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी, अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सखाराम यादव, सीएल यादव, संगीता राजेश यादव, राकेश यादव, डॉ. सुरेंद्र यादव, डॉ. शंकर लाल यादव, राम नरेश यादव, मनोज यादव, रेनू यादव, सूरज यादव, अवनीश यादव, दिलीप यादव, अशोक यादव, राजबहोर यादव, डॉ. शब्द सिंह यादव, राम कुशल यादव सहित यादव महासभा के अन्य प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

कृष्ण जन्मोत्सव ने दिया व्यापक सामाजिक संदेश

यादव महासभा का यह जन्माष्टमी समारोह धार्मिक आस्था के साथ कर्म, धर्म, पर्यावरण संरक्षण, जीव-दया, गौ सेवा और सामाजिक एकजुटता का संदेश देने वाला आयोजन रहा। उप मुख्यमंत्री के संबोधन में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए लोगों से उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया। समारोह का मूल संदेश यही रहा कि श्रीकृष्ण को केवल पूजने के बजाय उनके कर्म, विचार और जीवन मूल्यों को व्यवहार में उतारना ही जन्माष्टमी की सार्थकता है।

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