
अपने प्रेरक संबोधन में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। यदि आज जल संरक्षण के प्रति गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में जल संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को जल बचाने और जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प लेना होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान को व्यापक जनसहभागिता के साथ संचालित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं था, बल्कि समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना और प्रत्येक व्यक्ति को इस अभियान का सहभागी बनाना था।

उन्होंने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में लाखों जल संरक्षण कार्य किए गए। खेत तालाबों का निर्माण, अमृत सरोवरों का विकास, कुओं का रिचार्ज, चेकडैम निर्माण, नालों की सफाई, वर्षा जल संचयन, नदी संरक्षण और जल गुणवत्ता परीक्षण जैसे कार्यों ने जल संसाधनों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने और जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
श्री शुक्ल ने कहा कि जल संरक्षण केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से अभियान के दौरान विद्यालयों, आंगनवाड़ियों, ग्राम सभाओं तथा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जल के महत्व और उसके संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। महिलाओं, युवाओं, किसानों और स्वयंसेवी संगठनों ने अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने सभी विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों, नगरीय निकायों, स्वयंसेवी संस्थाओं, किसानों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनमें समाज की सक्रिय भागीदारी होती है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से अपने गांव, मोहल्ले और आसपास के जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने तथा जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की।
उप मुख्यमंत्री ने आगामी मानसून के दौरान संचालित होने वाले “एक पेड़ मां के नाम” अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और वृक्षारोपण एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां हरियाली होगी, वहां वर्षा का संतुलन बेहतर होगा, भूजल स्तर में वृद्धि होगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने प्रत्येक परिवार से कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया।
समारोह के अंत में श्री शुक्ल ने उपस्थित जनसमुदाय को जल संरक्षण की शपथ दिलाते हुए कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर जल बचाने का संकल्प ले, तो मध्यप्रदेश को जल समृद्ध, हरित और विकसित राज्य बनाने का सपना निश्चित रूप से साकार होगा।

कार्यक्रम में जनार्दन मिश्र, प्रभारी कलेक्टर अक्षत जैन, सीईओ जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर, एसडीएम अनुराग तिवारी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
जल गंगा संवर्धन अभियान का यह समापन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति समाज की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सामने आया। आने वाले समय में जनभागीदारी, तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के समन्वित प्रयास ही मध्यप्रदेश को जल संकट से सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

