खंडवा में वनमाली सृजन केन्द्रों का छठवाँ राष्ट्रीय सम्मेलन, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प | वनमाली जी की 114वीं जयंती पर देशभर के साहित्यकारों का जुटान, ‘स्वाधीनता के गान’ ने जगाया राष्ट्रप्रेम

खंडवा- सुप्रसिद्ध कथाकार, शिक्षाविद् एवं विचारक जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’ जी की 114वीं जयंती के अवसर पर वनमाली सृजन केन्द्रों का छठवाँ राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार, 9 अगस्त को डॉ. सी.वी. रामन विश्वविद्यालय, खंडवा में भव्यता के साथ आयोजित हुआ। सम्मेलन में देशभर से साहित्यकारों, कलाकारों, रचनाकारों और वनमाली सृजन केन्द्रों के अध्यक्षों एवं संयोजकों ने सहभागिता की।

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, असम, पश्चिम बंगाल और केरल से आए प्रतिनिधियों ने साहित्य, कला, संस्कृति और भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन पर विचार साझा किए।

साहित्यिक और सांस्कृतिक समाज निर्माण समय की जरूरत : संतोष चौबे

वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध कवि-कथाकार संतोष चौबे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आज साहित्यिक और सांस्कृतिक समाज का निर्माण समय की सबसे बड़ी जरूरत है। युद्ध और उन्माद के वैश्विक दौर में प्रेम, करुणा और मानवता ही दुनिया को बचाए रखने का आधार बन सकती है।

उन्होंने कहा कि वनमाली सृजन पीठ और सृजन केन्द्र छोटे शहरों, कस्बों तथा ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में युवा एवं वरिष्ठ रचनाकारों को जोड़कर साहित्य और संस्कृति का वातावरण तैयार कर रहे हैं। देशभर में समावेशी दृष्टिकोण के साथ वनमाली सृजन केन्द्रों का विस्तार करना संस्था का प्रमुख रचनात्मक ध्येय है।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ सम्मेलन का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत वनमाली जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व तथा अब तक आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलनों पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी के उद्घाटन से हुई। अतिथियों ने मां शारदा एवं वनमाली जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की।

संगीत महाविद्यालय, खंडवा के विद्यार्थियों ने मंगलाचरण में सुमधुर गीत प्रस्तुत किए। वनमाली जी के जीवन और रचनात्मक योगदान पर केंद्रित फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर वनमाली सृजन पीठ की वेबसाइट का लोकार्पण किया गया।

राष्ट्रीय संयोजक ज्योति रघुवंशी ने संस्था की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। वरिष्ठ साहित्यकार एवं व्यंग्यकार कैलाश मंडलेकर ने ‘वनमाली जी के गद्य में व्यंग्य की अंतर्धारा’ विषय पर विचार रखे।

कई महत्वपूर्ण पुस्तकों और पत्रिकाओं का लोकार्पण

सम्मेलन में ‘कला का आदर्श’, ‘वनमाली कथा’, ‘वनमाली वार्ता’, ‘वनमाली जी : एक कृति व्यक्तित्व’, ‘संपूर्ण कहानियां वनमाली’ और ‘वनमाली की कहानियों से गुजरते हुए’ सहित वनमाली सृजन केन्द्रों के रचनाकारों की पुस्तकों एवं पत्रिकाओं का लोकार्पण किया गया।

भोपाल, देवास और कानपुर के सृजन केन्द्र सम्मानित

सुदूर गांवों और कस्बों में साहित्य, कला, संस्कृति तथा सामाजिक सरोकारों की गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले उत्कृष्ट केन्द्रों को सम्मानित किया गया। वनमाली सृजन पीठ भोपाल, वनमाली सृजन केन्द्र देवास और वनमाली सृजन केन्द्र कानपुर को प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान किए गए।

सम्मेलन में सभी वनमाली सृजन केन्द्रों का परिचय सत्र भी आयोजित हुआ।

साहित्य और पुस्तक संस्कृति पर हुआ सार्थक संवाद

राष्ट्रीय सम्मेलन के सांगठनिक सत्र में ‘वनमाली सृजन पीठ एवं आईसेक्ट पब्लिकेशन की पुस्तक मित्र योजना’, ‘पुस्तक संस्कृति के विकास में विश्व रंग पुस्तक यात्रा का महत्व’ और ‘विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड : स्वरूप और परिकल्पना’ जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

काव्य गोष्ठी में कवियों ने बांधा समां

सम्मेलन के अवसर पर वनमाली सृजन केन्द्रों से आमंत्रित कवियों की काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। कवियों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ कर सावन की शाम को साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया। काव्य गोष्ठी का संचालन गोविंद शर्मा ने किया।

‘स्वाधीनता के गान’ से गूंजा राष्ट्रप्रेम

सम्मेलन का विशेष आकर्षण ‘स्वाधीनता के गान’ कार्यक्रम रहा। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय और विश्वरंग फाउंडेशन के संयोजन में प्रस्तुत इस कार्यक्रम में कविता और संगीत के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की चेतना को जीवंत किया गया।

टैगोर नाट्य विद्यालय, भोपाल के विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों और कविताओं की प्रस्तुति दी। ‘वंदेमातरम्’ की प्रस्तुति के दौरान सभागार में दर्शकों ने तिरंगे लहराए और भारत माता के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

कार्यक्रम में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, निराला, सुभद्रा कुमारी चौहान, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, माखनलाल चतुर्वेदी सहित अनेक कवियों की देशभक्ति रचनाओं को संगीत और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

‘स्वाधीनता के गान’ में हिंदी कविता की देशभक्ति धारा

आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रकाशित ‘स्वाधीनता के गान’ में हिंदी के 34 कवियों की 50 से अधिक देशभक्ति कविताओं को शामिल किया गया है। पुस्तक का संपादन साहित्यकार श्रीराम परिहार एवं रामवल्लभ आचार्य ने किया है। इसका परामर्श संतोष चौबे और समन्वय विनय उपाध्याय का रहा।

कार्यक्रम में यह संदेश भी प्रमुखता से उभरा कि स्वतंत्रता केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए जिम्मेदारी और चेतना का आधार है।

समापन पर दिया गया आभार

राष्ट्रीय सम्मेलन के अंत में वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष चौबे ने समाहार प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय संयोजक ज्योति रघुवंशी ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कलाकारों और प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सम्मेलन ने साहित्य, कला, संस्कृति और भाषा के माध्यम से समाज में रचनात्मक चेतना, मानवीय संवेदना और राष्ट्रप्रेम को मजबूत करने का संदेश दिया।

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