खंडवा- जिले की प्राथमिक सहकारी समिति मर्यादित, पिपलानी से जुड़े बहुचर्चित वित्तीय अनियमितता प्रकरण में न्यायालय उप पंजीयक सहकारी संस्था ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच प्रतिवादियों की अचल संपत्तियों की कुर्की के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई कुल 62 करोड़ 78 लाख 6 हजार 34 रुपये की राशि की वसूली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
जारी आदेश के अनुसार प्रकरण के अंतिम निराकरण तक संबंधित व्यक्तियों की अचल संपत्तियों को अटैच रखा जाएगा। जिन लोगों की संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई की गई है, उनमें प्राथमिक सहकारी समिति पिपलानी के तत्कालीन समिति प्रबंधक श्रीराम राजपूत एवं महेन्द्र सिंह ठाकुर, तत्कालीन लिपिक उमाशंकर सोलंकी, तथा सहायक प्रबंधक कृपाल सिंह धुर्वे और हरीश चौरसिया शामिल हैं।
सहकारिता विभाग की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई
सहकारिता विभाग द्वारा की गई यह कार्रवाई जिले में सहकारी संस्थाओं में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। न्यायालय उप पंजीयक सहकारी संस्था ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध यह आदेश पारित किया है, ताकि करोड़ों रुपये की राशि की वसूली की प्रक्रिया प्रभावित न हो और शासन के हितों की रक्षा की जा सके।
प्रकरण के अंतिम निर्णय तक रहेगा संपत्तियों पर प्रतिबंध
आदेश के तहत संबंधित प्रतिवादियों की अचल संपत्तियों को प्रकरण के अंतिम निराकरण तक अटैच रखा जाएगा। इस अवधि में संबंधित संपत्तियों के हस्तांतरण, विक्रय अथवा अन्य प्रकार के लेन-देन पर प्रतिबंध रहेगा। इससे भविष्य में वसूली प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने में प्रशासन को सहायता मिलेगी।
सहकारी संस्थाओं में जवाबदेही का संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों रुपये की वसूली के लिए की गई यह कार्रवाई सहकारी संस्थाओं में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि वित्तीय अनियमितताओं और शासकीय धन के दुरुपयोग के मामलों में प्रशासन अब सख्त रुख अपना रहा है। इससे सहकारी संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा।
जिले में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
62.78 करोड़ रुपये की वसूली से जुड़ा यह मामला जिले के सहकारिता क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक हलकों में इसे अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। सहकारिता विभाग के इस कदम से यह भी संकेत मिला है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी और शासन के धन की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
