खंडवा- जिले में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। हरसूद अनुभाग के कई गांवों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि किसानों की चिंता भी लगातार बढ़ रही है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में गरबड़ी गांव शामिल है, जहां तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आने से गांव का जिला मुख्यालय खंडवा और निकटवर्ती खिरकिया नगर से सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। संपर्क मार्गों पर तेज बहाव के चलते आवागमन बंद हो गया है और ग्रामीणों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

लगातार हो रही बारिश से गांव को जोड़ने वाले पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बह रहा है। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार, अस्पताल, बैंक और शासकीय कार्यालयों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। यदि किसी मरीज को तत्काल उपचार की आवश्यकता पड़े तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
बारिश का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर पड़ा है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई के बाद हुई तेज वर्षा ने किसानों की उम्मीदों को झटका दिया है। कई खेतों में पानी भर जाने से फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है, जबकि तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नवांकुरित सोयाबीन बह गई। किसानों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और आर्थिक बोझ भी बढ़ जाएगा।

लगातार हो रही वर्षा के कारण घोड़ा पछाड़ नदी पर स्थित पिपलिया डेम में जलभराव तेजी से बढ़ गया। जलस्तर सुरक्षित सीमा के करीब पहुंचने पर डेम से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया, जिससे नदी में जलप्रवाह बढ़ गया है। प्रशासन द्वारा नदी किनारे रहने वाले लोगों और निचले क्षेत्रों के निवासियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
वहीं किल्लौद क्षेत्र में भी तेज बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। सड़कों और गलियों में पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

लगातार हो रही बारिश ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत सड़क नेटवर्क, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियां समय की बड़ी आवश्यकता हैं। हर वर्ष मानसून के दौरान कई गांवों का संपर्क टूटने और किसानों को फसल नुकसान उठाने की स्थिति सामने आती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इधर, जिला प्रशासन ने लोगों से पूरी तरह सजग और सतर्क रहने की अपील की है। प्रशासन ने नागरिकों से उफनते नदी-नालों और पुल-पुलियों को पार नहीं करने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया है। साथ ही संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी रखने, सड़क संपर्क बहाल करने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि आगामी दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहता है तो जिले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी जनजीवन और कृषि पर इसका असर और गहरा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ फसल नुकसान का शीघ्र सर्वे कर प्रभावित किसानों को समय पर सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

