बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में गूंजा कृष्ण जन्मोत्सव, गौसेवकों के बीच पहुंचे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल | ‘गौ सेवा ही धर्म की सबसे बड़ी सेवा’-उप मुख्यमंत्री ने किया भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता का पूजन, प्राकृतिक खेती को अपनाने का दिया संदेश

रीवा- भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में भक्ति, सेवा और संस्कार का अद्भुत संगम देखने को मिला। मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने गौ अभ्यारण्य पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता का विधिवत पूजन किया तथा बड़ी संख्या में मौजूद गौसेवकों के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाया। इस अवसर पर अभ्यारण्य परिसर धार्मिक आस्था और गौ सेवा के भाव से सराबोर नजर आया।

उप मुख्यमंत्री ने कृष्ण मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद कहा कि गौ माता की सेवा ही सच्ची धर्म सेवा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है और गौ सेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानवता, प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ी जिम्मेदारी भी है। जब मनुष्य गौ माता और प्रकृति से विमुख होता है, तब अनेक प्रकार के संकट सामने आते हैं।

9 हजार से अधिक गौवंश को मिल रहा आश्रय

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बसामन मामा गौ अभ्यारण्य अब एक बड़े गौ संरक्षण केंद्र के साथ-साथ आश्रम का स्वरूप ले चुका है। यहां 9 हजार से अधिक गौवंश की सेवा और संरक्षण किया जा रहा है। बेसहारा और निराश्रित गौवंश के लिए यह स्थान सुरक्षित आश्रय बना है।

उन्होंने बताया कि रीवा के लक्ष्मणबाग गौशाला में भी करीब एक हजार गौवंश को आश्रय दिया गया है। वहीं हिनौती गौधाम में 20 हजार से अधिक गौवंश को आश्रय देने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण के साथ-साथ गौ आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि को भी मजबूत किया जा सकता है।

गौ सेवा से प्राकृतिक खेती तक बढ़ रहा अभ्यारण्य का दायरा

बसामन मामा गौ अभ्यारण्य की विशेषता केवल गौ संरक्षण तक सीमित नहीं है। इसे प्राकृतिक खेती के मॉडल के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। अभ्यारण्य के आसपास के किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती का मूल आधार गौपालन और गौ सेवा है। गौ आधारित प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, रासायनिक कृषि पर निर्भरता कम करने और स्वस्थ खाद्यान्न उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी भूमि के 10 से 20 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक खेती शुरू करें और वहां उत्पादित अनाज का उपयोग अपने परिवार के लिए करें। इससे परिवार को पौष्टिक और निर्मल खाद्यान्न उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी तथा धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती का दायरा भी बढ़ेगा।

जन्माष्टमी को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का संदेश

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन गौ सेवा, प्रकृति और कर्म के संदेश से जुड़ा रहा है। इसलिए जन्माष्टमी का अवसर प्राकृतिक खेती की शुरुआत के लिए भी शुभ है। उन्होंने कहा कि स्वयं को स्वस्थ रखने और आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए कृषि पद्धतियों में सकारात्मक बदलाव आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया है। प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता देते हुए किसानों को इसके प्रति जागरूक करने और प्रशिक्षण देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

52 एकड़ में बंजर जमीन से विकसित हुआ हराभरा अभ्यारण्य

कार्यक्रम में पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी ने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस स्थान पर कभी पथरीली और बंजर जमीन थी, वहां आज 52 एकड़ क्षेत्र में हराभरा गौ अभ्यारण्य विकसित हो चुका है।

उन्होंने कहा कि अभ्यारण्य के निर्माण और विकास के दौरान कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के प्रयासों और गौ सेवा के प्रति समर्पित लोगों की मेहनत से यह स्थान निरंतर विकसित होता गया।

अभ्यारण्य के आसपास बनाए गए तीन स्टॉप डैम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनके निर्माण से आसपास के गांवों में पेयजल की समस्या को दूर करने में भी सहायता मिली है। इस तरह गौ संरक्षण के साथ यह क्षेत्र ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दृष्टि से भी उपयोगी साबित हो रहा है।

गौ सेवा का आदर्श केंद्र बना अभ्यारण्य

जिला पंचायत की नवागत मुख्य कार्यपालन अधिकारी सृष्टि देशमुख ने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य को गौ सेवा का आदर्श केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि एक ही स्थान पर 9 हजार से अधिक गौवंश को आश्रय और सेवा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने अभ्यारण्य को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक प्रयास जारी रखने की बात कही।

वहीं गौ अभ्यारण्य प्रबंधन समिति की अध्यक्ष एवं एसडीएम सिरमौर दृष्टि जायसवाल ने कहा कि गौ सेवकों की नि:स्वार्थ सेवा और सामूहिक प्रयासों के कारण अभ्यारण्य लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गौ माता की सेवा के साथ यह स्थान प्राकृतिक खेती के मॉडल के रूप में भी तेजी से विकसित हो रहा है।

कृष्ण के निष्काम कर्म का संदेश अपनाने का आह्वान

कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके कर्म संदेश को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मनुष्य को निष्काम भाव से कर्म करने का संदेश दिया। इसी भावना को अपने जीवन और सामाजिक दायित्वों में अपनाने की आवश्यकता है।

बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में आयोजित कृष्ण जन्मोत्सव ने धार्मिक आयोजन को गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक खेती और सामाजिक जिम्मेदारी के संदेश से जोड़ दिया। यहां मौजूद गौसेवकों और अधिकारियों ने गौ संरक्षण के संकल्प को और मजबूत करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम में उप संचालक पशुपालन डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरूणेन्द्र शुक्ला, प्रभारी सीईओ जनपद पंचायत सिरमौर प्राची चौबे सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में गौसेवक उपस्थित रहे।

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कार्यक्रम के अंत में सभी प्रदेशवासियों और गौसेवकों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में मनाया गया यह कृष्ण जन्मोत्सव धार्मिक आस्था के साथ गौ सेवा और प्राकृतिक जीवन-पद्धति को अपनाने का संदेश भी दे गया।

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