विरासत से जुड़कर विद्यार्थियों ने रचा सृजन का संसार | ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल आशापुर में ‘हमारी विरासत–हमारी पहचान’ हेरिटेज एग्ज़िबिशन ने बटोरी सराहना

नया हरसूद- शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, इतिहास, परंपराओं और विरासत से जोड़ते हुए उनके भीतर रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास और नवाचार की भावना विकसित करना भी है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल, आशापुर में गुरुवार को ‘हमारी विरासत–हमारी पहचान’ विषय पर हेरिटेज एग्ज़िबिशन 2026–27 का भव्य आयोजन किया गया।

प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता, मेहनत, शोध क्षमता और कलात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए भारत की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक विरासत को आकर्षक मॉडलों के माध्यम से प्रस्तुत किया। विद्यालय परिसर में सजे विभिन्न मॉडल न केवल दर्शनीय रहे, बल्कि विद्यार्थियों की विषयगत समझ और सीखने की क्षमता को भी प्रदर्शित करते नजर आए।

मॉडल में दिखाई दी भारत की गौरवशाली पहचान

हेरिटेज एग्ज़िबिशन का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के मॉडल रहे। बच्चों ने देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक स्मारकों और प्राकृतिक धरोहरों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से जीवंत रूप देने का प्रयास किया।

प्रदर्शनी में महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन, सांची स्तूप, भीमबेटका की गुफाएं, भोजेश्वर महादेव मंदिर, जल महल मांडू, कुतुब मीनार, रेड फोर्ट (लाल किला), इंडिया गेट और अयोध्या का राम मंदिर सहित अनेक प्रमुख धरोहरों के मॉडल प्रदर्शित किए गए।

इसके अलावा विद्यार्थियों ने मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विविधता, प्रदेश के विभिन्न संभाग एवं जिलों तथा राष्ट्रीय उद्यानों और प्राकृतिक धरोहरों को भी मॉडल के माध्यम से दर्शाया। प्रत्येक मॉडल के पीछे विद्यार्थियों की मेहनत और विषय को समझने का प्रयास स्पष्ट दिखाई दिया।

किताबों से बाहर निकलकर सीखने का मिला अवसर

इस प्रदर्शनी की खासियत यह रही कि विद्यार्थियों ने केवल मॉडल बनाकर प्रदर्शित नहीं किए, बल्कि उनके पीछे छिपे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को समझने का भी प्रयास किया। मॉडल तैयार करने के दौरान बच्चों को संबंधित स्थलों, उनकी विशेषताओं, इतिहास और भारतीय संस्कृति में उनके महत्व के बारे में जानकारी जुटाने का अवसर मिला।

इस तरह यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ‘करके सीखने’ यानी गतिविधि आधारित शिक्षा का प्रभावी माध्यम बना। मॉडल निर्माण ने बच्चों में टीमवर्क, समस्या समाधान, शोध, प्रस्तुतीकरण और रचनात्मक सोच जैसी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर दिया।

निर्णायक मंडल ने परखी विद्यार्थियों की प्रतिभा

प्रदर्शनी में प्रस्तुत मॉडलों का मूल्यांकन विशिष्ट अतिथियों एवं निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र नामदेव, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आशापुर के अध्यापक विश्वेश्वर भट्ट, वरिष्ठ अधिवक्ता रोहित माली, निलेश कौशल तथा एल.एस. घेरे ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का मूल्यांकन किया।

निर्णायक मंडल ने मॉडल की सुंदरता एवं कार्यकुशलता के साथ-साथ विषय की प्रासंगिकता, प्रस्तुत जानकारी, विद्यार्थियों की प्रस्तुति और मॉडल के समग्र प्रभाव को भी मूल्यांकन का आधार बनाया। निर्णायकों ने बच्चों से उनके मॉडलों से संबंधित जानकारी ली और उनकी प्रस्तुति क्षमता का भी अवलोकन किया।

विद्यार्थियों ने अपने-अपने मॉडल के बारे में पूरे आत्मविश्वास के साथ जानकारी प्रस्तुत की। उनकी तैयारी और विषय के प्रति समझ ने निर्णायक मंडल एवं उपस्थित अभिभावकों को प्रभावित किया।

बच्चों की रचनात्मकता बनी आकर्षण का केंद्र

प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने जिस उत्साह के साथ सहभागिता की, वह पूरे आयोजन में दिखाई दिया। नंदिनी पटेल, समीक्षा मालाकार, अंश निकुम, अथर्व धनराम, आलोक मालवीय, संयोगिता तिरोले, हुसैन मंसूरी, अदिति तमखाने, युग मीणा, नंदिनी निकुंम, अवंतिका तिरोले, भावना राजपूत, आलिया खान और डिंपल यादव सहित अनेक विद्यार्थियों ने अपने मॉडल प्रस्तुत किए।

विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों में उनकी कलात्मक क्षमता के साथ-साथ विषय को लेकर उनकी जिज्ञासा और समझ भी दिखाई दी। कई विद्यार्थियों ने अपने मॉडल के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए यह बताया कि संबंधित धरोहर भारत के इतिहास और संस्कृति में किस प्रकार महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

अभिभावकों और अतिथियों ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ अपनी जड़ों और विरासत को समझने का अवसर प्रदान करती हैं।

भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति जागरूकता का प्रयास

‘हमारी विरासत–हमारी पहचान’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आई। भारत की प्राचीन सभ्यता, ऐतिहासिक स्मारक, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक संपदा देश की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नई पीढ़ी को इनके महत्व से परिचित कराना और इनके संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना भी आवश्यक है।

विद्यालय द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी विरासत को केवल देखा या पढ़ा नहीं, बल्कि उसे मॉडल के रूप में गढ़कर, उसके बारे में जानकारी एकत्रित कर और दूसरों के सामने प्रस्तुत कर उसे समझने का प्रयास किया।

शिक्षा के साथ संस्कार और सृजनात्मकता पर जोर

ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल आशापुर लंबे समय से शिक्षा में नवाचार, रचनात्मक शिक्षण और गतिविधि आधारित शिक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में प्रयासरत है। विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को विकसित करना है।

ऐसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, टीम भावना, शोध प्रवृत्ति और रचनात्मक सोच विकसित होती है। साथ ही उन्हें अपनी संस्कृति और देश की गौरवशाली विरासत को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

विद्यालय प्रबंधन ने किया विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन

कार्यक्रम विद्यालय के प्रबंधक एवं प्राचार्य श्री प्रियांशु भंडारी एवं श्रीमती जूही भंडारी के मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। विद्यालय प्रबंधन ने विद्यार्थियों के प्रयासों को प्रोत्साहित करते हुए इस प्रकार की गतिविधियों को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

विद्यालय प्रबंधन की सोच है कि विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण दिया जाए, जहां वे अपनी प्रतिभा को पहचान सकें और उसे रचनात्मक दिशा दे सकें। इसी सोच के अनुरूप हेरिटेज एग्ज़िबिशन ने विद्यार्थियों को अपनी कल्पना को वास्तविक स्वरूप देने का अवसर प्रदान किया।

‘हमारी विरासत–हमारी पहचान’ बनी यादगार पहल

ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल आशापुर की यह हेरिटेज एग्ज़िबिशन विद्यार्थियों के लिए सीखने और सृजन का यादगार अनुभव बनी। कार्यक्रम में जहां एक ओर बच्चों ने भारत की समृद्ध विरासत को मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत किया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने शोध, प्रस्तुति और रचनात्मकता के माध्यम से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

‘हमारी विरासत–हमारी पहचान’ का संदेश यही रहा कि अपनी विरासत को जानना अपनी पहचान को समझना है। शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति और सृजनात्मकता को जोड़ने वाली यह पहल विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक आत्मविश्वासी और रचनात्मक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

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