रक्षा सूत्र में छिपा आत्मिक संदेश: उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल बोले—‘पांच विकारों से आत्मा की रक्षा ही सच्चा रक्षाबंधन’ | ब्रह्माकुमारीज़ ने उप मुख्यमंत्री को बांधा शिव बाबा का पवित्र रक्षा सूत्र, पवित्रता, आत्मिक प्रेम और सामाजिक सद्भाव का दिया संदेश

भोपाल- रक्षाबंधन के पावन पर्व पर राजधानी भोपाल में आध्यात्मिकता और सामाजिक सद्भाव का अनूठा संदेश देखने को मिला। ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल को शिव बाबा का पवित्र रक्षा सूत्र बांधा गया। भोपाल जोन राजयोग भवन की डायरेक्टर राजयोगिनी बीके निर्मला बहन ने माउंट आबू से लाए गए रक्षा सूत्र से उप मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और पवित्रता, आत्मिक प्रेम, भाईचारे तथा सद्भाव का संदेश दिया।

रक्षा सूत्र बांधने की इस परंपरा को केवल भाई-बहन के पारंपरिक रिश्ते तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मिक और नैतिक जीवन मूल्यों से जोड़ा गया। इस अवसर पर व्यक्ति के आंतरिक जीवन को सकारात्मक बनाने, नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहने और समाज में प्रेम एवं भाईचारे की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

समाज को जोड़ने वाली सेवा सबसे पुनीत सेवा

उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने ब्रह्माकुमारीज़ की बहनों द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने वाली सेवा सबसे पुनीत सेवा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक समरसता, आपसी विश्वास और सकारात्मक सोच को मजबूत करने की आवश्यकता है। ऐसे में आध्यात्मिक संस्थाओं द्वारा किए जा रहे प्रयास समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने रक्षाबंधन पर्व की व्यापक भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक नहीं है, बल्कि मानव जीवन में पवित्रता, आत्मिक प्रेम और सद्भाव को स्थापित करने का अवसर भी है।

‘पांच विकारों से सुरक्षित हो आत्मा’

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा—“सच्चा रक्षाबंधन वही है, जब आत्मा पांच विकारों से सुरक्षित हो।”

उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे पांच विकार मनुष्य के जीवन में अशांति और नकारात्मकता का कारण बन सकते हैं। इनसे स्वयं को सुरक्षित रखना ही वास्तविक आत्मिक रक्षा है। व्यक्ति यदि अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों में पवित्रता को स्थान देता है तो उसका प्रभाव केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के वातावरण पर भी पड़ता है।

उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ विचार और संस्कार व्यक्ति के व्यक्तित्व को मजबूत बनाते हैं। सकारात्मक सोच से आपसी संबंधों में मधुरता आती है और समाज में शांति एवं सद्भाव का वातावरण निर्मित होता है।

रक्षा सूत्र बना पवित्रता और सद्भाव का प्रतीक

ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से बांधा गया शिव बाबा का रक्षा सूत्र इस अवसर पर आत्मिक संकल्प का प्रतीक बना। माउंट आबू से लाए गए रक्षा सूत्र के माध्यम से पवित्र जीवन, आत्मिक चेतना और मानवता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

राजयोगिनी बीके निर्मला बहन ने रक्षाबंधन की भावना को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए सकारात्मक विचारों और श्रेष्ठ संस्कारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि आत्मिक शक्ति और पवित्रता के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को नकारात्मक प्रभावों से बचाते हुए समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण में योगदान दे सकता है।

व्यक्ति से राष्ट्र तक सकारात्मक सोच का प्रभाव

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती केवल भौतिक विकास से नहीं, बल्कि उसके नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से भी निर्धारित होती है। जब व्यक्ति अपने जीवन में संयम, पवित्रता, प्रेम, शांति और सद्भाव जैसे मूल्यों को अपनाता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार और समाज पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पर्व हमें अपनी जिम्मेदारियों और जीवन मूल्यों की याद दिलाते हैं। यह पर्व हमें केवल एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प नहीं देता, बल्कि अपने भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों से भी संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।

आध्यात्मिक चेतना से सामाजिक समरसता का संदेश

कार्यक्रम में रक्षाबंधन को आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता से जोड़ते हुए आपसी प्रेम, भाईचारे और मानवता की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया गया। ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम इसी संदेश का प्रतीक रहा कि बाहरी सुरक्षा के साथ-साथ मनुष्य को अपनी आत्मिक शक्तियों और संस्कारों की भी रक्षा करनी चाहिए।

रक्षा सूत्र के माध्यम से दिया गया यह संदेश रक्षाबंधन पर्व की व्यापक भावना को सामने लाता है—पवित्र विचार अपनाएं, पांच विकारों से स्वयं की रक्षा करें और प्रेम, शांति तथा सद्भाव से समाज को मजबूत बनाएं।

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